आंधी:राजस्थान के आंधी कस्बे के सीएचसी अस्पताल (Community Health Center) में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है।अस्पताल में आयोजित महिला नसबंदी शिविर के दौरान, ऑपरेशन के बाद मरीजों को जमीन पर लेटाकर इलाज किया गया, जबकि अस्पताल में खाली बेड उपलब्ध थे।यह घटना न केवल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और असंवेदनशीलता को उजागर करती है, बल्कि सरकार की महिला स्वास्थ्य योजनाओं पर भी सवाल खड़े करती है।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिविर में आई महिलाओं की नसबंदी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें आराम और निगरानी के लिए बेड पर रखना चाहिए था, लेकिन स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें सीधे अस्पताल की फर्श पर लिटा दिया।फर्श पर बिना किसी चादर या गद्दे के लेटी महिलाएं दर्द से कराहती रहीं, जबकि अस्पताल के वार्ड में कई बेड खाली पड़े थे।ग्रामीणों और परिजनों ने इस दृश्य को देखकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और इसे “महिलाओं की गरिमा का अपमान” बताया।
जनता और स्थानीय संगठनों ने जताई नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने कहा कि यह सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों पर कड़ा तमाचा है।ग्रामीणों ने प्रशासन से जिम्मेदार चिकित्सकों और स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।लोगों ने कहा कि सरकार महिलाओं के सम्मान और स्वास्थ्य को लेकर वाहवाही लूटने में व्यस्त है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसी घटनाएं सरकारी दावों की पोल खोलती हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नसबंदी के बाद महिलाओं को कम से कम 3 से 4 घंटे तक साफ-सुथरे और आरामदायक वातावरण में रखा जाना चाहिए ताकि संक्रमण या जटिलता का खतरा न हो।लेकिन आंधी सीएचसी में यह बुनियादी चिकित्सा मानक भी नजरअंदाज कर दिया गया।इस प्रकार की लापरवाही महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकती है।
जांच की मांग और प्रशासन की प्रतिक्रिया
घटना के वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी और अगर लापरवाही साबित होती है तो दोषियों पर कार्रवाई होगी।हालांकि, स्थानीय लोगों को आशंका है कि यह जांच केवल खानापूर्ति बनकर न रह जाए।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करेंगे।आंधी सीएचसी अस्पताल की यह घटना मानवता और चिकित्सा नैतिकता दोनों पर सवाल खड़े करती है।सरकार को चाहिए कि वह न केवल जांच कराए, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाए।महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कर्मचारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।जनता की अपेक्षा है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और महिलाओं के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करे।
संवाददाता_ सत्यनारायण शर्मा
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