कांग्रेस सांसद राहुल गांधी बुधवार को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। माना जा रहा है कि वे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और मतदाता सूची में गड़बड़ियों पर नया खुलासा कर सकते हैं। राहुल पहले ही कह चुके हैं कि वे इस मुद्दे पर एक “हाइड्रोजन बम” गिराने वाले हैं।
राहुल ने 66 दिन पहले दिया था ‘हाइड्रोजन बम’ वाला बयान
1 सितंबर को राहुल गांधी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा था कि वे जल्द ही वोट चोरी के सबूतों का हाइड्रोजन बम फोड़ेंगे। उन्होंने दावा किया था कि कर्नाटक की महादेवपुरा सीट में जो गड़बड़ी दिखी थी, वह तो सिर्फ एक “परमाणु बम” थी, जबकि अब उनके पास उससे भी बड़े प्रमाण हैं। राहुल ने कहा था कि मतदाता सूची में हजारों नामों को योजनाबद्ध तरीके से हटाया गया है ताकि भाजपा को फायदा पहुंचाया जा सके।

पहले भी दो बार उठा चुके हैं वोट चोरी का मुद्दा
राहुल गांधी ने अब तक इस विषय पर दो बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की है — 7 अगस्त और 18 सितंबर को।
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7 अगस्त: राहुल ने 22 पेज का प्रेजेंटेशन दिखाकर कहा था कि वोटर लिस्ट में “संदिग्ध वोटर” शामिल किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और कर्नाटक चुनावों में वोटर लिस्ट से छेड़छाड़ की गई।
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18 सितंबर: राहुल ने कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार “वोट चोरों की रक्षा” कर रहे हैं। उन्होंने एक ऐसे शख्स को भी मंच पर बुलाया, जिसका दावा था कि उसका नाम मतदाता सूची से हटाया गया।
EC ने राहुल के आरोपों को बताया निराधार
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब 17 अगस्त और 18 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दिया।
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17 अगस्त: EC ने कहा कि राहुल के प्रेजेंटेशन में दिखाया गया डेटा चुनाव आयोग का नहीं था। आयोग ने उनसे हलफनामा देने या माफी मांगने को कहा।
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18 सितंबर: आयोग ने दोहराया कि किसी भी वोटर का नाम ऑनलाइन नहीं हटाया जा सकता और कर्नाटक की आलंद सीट पर किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई।

राहुल ने 18 सितंबर को दिल्ली में ‘वोट चोरी’ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक व्यक्ति को भी मंच पर बुलाया, जिसका दावा था कि उसका नाम हटाया गया है।
क्या है SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन?
SIR का मतलब होता है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जिसके तहत निर्वाचन आयोग मतदाता सूचियों की समीक्षा करता है। राहुल का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पक्षपात और तकनीकी छेड़छाड़ की जा रही है। वे दावा करते हैं कि कई स्थानों पर वोटर डेटा दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबरों से बदला गया, जिससे कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाए गए।
‘वोट चोरी’ को लेकर कांग्रेस की रणनीति
राहुल गांधी और कांग्रेस अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का विषय बना रहे हैं। पार्टी का कहना है कि अगर मतदाता सूची में धांधली हुई है, तो यह लोकतंत्र की जड़ पर प्रहार है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में वे नए दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और वोटर डेटा एनालिसिस पेश कर सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
राहुल गांधी की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के नेताओं की नजर राहुल के “हाइड्रोजन बम” वाले खुलासे पर टिकी है। वहीं, चुनाव आयोग ने कहा है कि वह किसी भी आरोप की जांच के लिए तैयार है, लेकिन भ्रम फैलाने वाली जानकारी पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
राहुल गांधी की आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारतीय राजनीति में नया विवाद खड़ा कर सकती है। अगर वे SIR और वोटर लिस्ट अनियमितताओं पर ठोस सबूत पेश करते हैं, तो यह मामला 2024 के आगामी चुनावों से पहले बड़ा मुद्दा बन सकता है। वहीं, चुनाव आयोग की सख्त प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।





