बारां, संवाददाता: घनश्याम दाधीच
अंता उपखंड की ग्राम पंचायत पलसावा के गांव डाबरी काकाजी स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय इन दिनों डाबरी काकाजी विद्यालय शिक्षा स्तर विवाद को लेकर सुर्खियों में है। विद्यालय में समय पर पढ़ाई नहीं होने, शिक्षकों की अनुपस्थिति और बच्चों के कमजोर शैक्षणिक स्तर को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
विद्यालय निरीक्षण में क्या सामने आया
सरपंच ललिता मीणा, प्रतिनिधि मनोज मीणा और ग्रामीणों ने जब विद्यालय का निरीक्षण किया, तो कई शिक्षक मौके पर अनुपस्थित मिले। निरीक्षण के दौरान विषयवार बच्चों से प्रश्न पूछे गए, लेकिन बच्चे बुनियादी सवालों के भी उत्तर नहीं दे सके। यह स्थिति उस समय सामने आई जब परीक्षा कुछ ही दिनों में प्रस्तावित है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
बच्चों की शैक्षणिक स्थिति पर गंभीर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि डाबरी काकाजी विद्यालय शिक्षा स्तर विवाद की जड़ बच्चों की नियमित पढ़ाई न होना है। बच्चों की उत्तर देने में असमर्थता यह दर्शाती है कि उन्हें समय पर पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाया गया। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष का परीक्षा परिणाम भी विद्यालय के लिए निराशाजनक रहा था।
सरपंच और ग्रामीणों के आरोप
सरपंच ललिता मीणा ने आरोप लगाया कि विद्यालय में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समय पर विद्यालय नहीं आते और पढ़ाई को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। ग्रामीणों ने जब विद्यालय स्टाफ से स्थिति को लेकर सवाल किए, तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रम को लेकर विवाद
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर सरपंच और ग्रामीणों को आमंत्रित नहीं किया गया। पंचायत क्षेत्र के विद्यालयों में आमतौर पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों को बुलाया जाता है, लेकिन इस विद्यालय में ऐसा नहीं हुआ। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और अविश्वास का माहौल बना।
प्रशासन और शिक्षा विभाग का पक्ष
मामले में सीबीओ अंता ममता चौधरी ने आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पीओ स्तर पर जांच में इस तरह की कोई गंभीर बात सामने नहीं आई है। उनके अनुसार गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में सरपंच और ग्रामीणों को आमंत्रित किया गया था। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ प्रशासनिक कमियां हो सकती हैं, लेकिन शिकायत पूरी तरह सही नहीं है।
ग्रामीणों की मांग और आगे की कार्रवाई
सरपंच प्रतिनिधि मनोज मीणा ने स्पष्ट किया कि बच्चों की पढ़ाई से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि समय पर विषय नहीं पढ़ाए गए तो परीक्षा में बच्चे क्या लिखेंगे, यह बड़ा सवाल है। इसी को लेकर उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई है और संस्था प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
डाबरी काकाजी विद्यालय शिक्षा स्तर विवाद केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की व्यापक समस्या को उजागर करता है। सरकारी विद्यालयों में नियमित निरीक्षण, शिक्षकों की जवाबदेही और बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
डाबरी काकाजी राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में सामने आया विवाद शिक्षा व्यवस्था के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते जांच और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ेगा। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में कितनी गंभीरता दिखाता है और बच्चों के हित में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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