टोंक, संवाददाता: कमलेश प्रजापति
टोरडी सागर ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत मिशन की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। जमीनी स्तर पर हालात ऐसे हैं कि स्वच्छता के दावे पूरी तरह खोखले नजर आ रहे हैं। पंचायत के मुख्य बाजार क्षेत्र में गंदगी और बदबू ने ग्रामीणों का जीना मुश्किल कर दिया है। टोरडी में स्वच्छ भारत मिशन फेल होना अब केवल आरोप नहीं, बल्कि रोजमर्रा की सच्चाई बन चुका है।
मुख्य बाजार की नालियां बनी गंदगी का केंद्र
टोरडी के मुख्य बाजार में बनी नालियां पिछले लंबे समय से गंदगी का अड्डा बनी हुई हैं। टोंक मुख्यालय की ओर जाने वाली मुख्य सड़क के दोनों ओर बनी नालियां पूरी तरह कचरे से चोक हो चुकी हैं। नालियों में जमा गंदा पानी अब सड़कर कीचड़ का रूप ले चुका है।
एक साल से नहीं हुई सफाई, हालात बदतर
ग्रामीणों का कहना है कि बीते एक वर्ष से नालियों की कोई नियमित सफाई नहीं की गई। बरसात के मौसम में हालात और ज्यादा खराब हो गए, लेकिन जिम्मेदारों ने कोई ध्यान नहीं दिया। समय पर सफाई नहीं होने से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
दुर्गंध और कीचड़ से जनजीवन प्रभावित
नालियों से उठती तेज दुर्गंध के कारण पूरे बाजार क्षेत्र में रहना मुश्किल हो गया है। दुकानदारों और राहगीरों को सांस लेने तक में परेशानी हो रही है। कई लोग मजबूरी में मुंह ढककर बाजार से गुजर रहे हैं।
दुकानदारों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी
गंदगी और बदबू के कारण ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं। इससे स्थानीय दुकानदारों का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हालात ऐसे पहले कभी नहीं देखे गए।
भुगतान पर उठे गंभीर सवाल
ग्रामीणों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सफाई हुई ही नहीं, तो भुगतान कैसे हो गया। सफाई कार्य के नाम पर हुए खर्च अब संदेह के घेरे में हैं। यह मामला सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितताओं की ओर इशारा करता है।
ठेकेदार और जिम्मेदारों पर आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार ने बिना काम किए ही भुगतान उठा लिया। वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारियों पर भी आंख मूंदकर कागजी कार्रवाई करने के आरोप लग रहे हैं। पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है।
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा
गंदे पानी और कीचड़ के कारण मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द सफाई नहीं हुई तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
ग्रामीणों की प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। साथ ही तत्काल प्रभाव से नालियों की सफाई कराए जाने की अपील की गई है।
कागजों में सीमित स्वच्छता अभियान
टोरडी में स्वच्छ भारत मिशन फेल होना यह साबित करता है कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित हैं। जब तक जमीनी निगरानी और पारदर्शिता नहीं होगी, तब तक हालात नहीं बदलेंगे।
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