बूंदी,संवाददाता: रवि शर्मा
राजस्थान के बूंदी जिले के तालेड़ा उपखंड की ग्राम पंचायत बाजड में रहने वाली सिमरनजीत कौर ने वह कर दिखाया, जिसकी उम्मीद पूरे देश को थी। दृष्टिबाधित महिला विश्व कप में भारतीय टीम की ओर से खेलते हुए उन्होंने न केवल शानदार प्रदर्शन किया बल्कि ‘वुमन ऑफ द मैच’ बनकर इतिहास भी रच दिया।देश और राजस्थान के लिए यह गर्व का क्षण है, क्योंकि सिमरनजीत इस टूर्नामेंट में भाग लेने वाली राजस्थान की एकमात्र महिला खिलाड़ी थीं।
गाँव से विश्व कप तक—सिमरनजीत की प्रेरक यात्रा
सिमरनजीत कौर, गुरु पाल सिंह की सुपुत्री, बचपन से ही आत्मविश्वास और साहस का प्रतीक रही हैं। दृष्टिबाधा जैसी चुनौती के बावजूद क्रिकेट में आगे बढ़ने का जुनून उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा।उनकी यह मेहनत तब सफल हुई जब वे भारतीय दृष्टिबाधित महिला क्रिकेट टीम में चयनित हुईं और फिर श्रीलंका में आयोजित विश्व कप में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया।
RCA for the Blind ने की सराहना—“राजस्थान का गौरव हैं सिमरन”
राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड के अध्यक्ष गोवर्धन लाल बेखा ने कहा—“सिमरनजीत कौर ने अपने प्रदर्शन से न केवल टीम को मजबूती दी, बल्कि पूरे राज्य और देश का मान बढ़ाया है।”महासचिव इस्लाम अली ने बताया कि:
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सिमरन राजस्थान से एकमात्र चयनित खिलाड़ी थीं
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उन्होंने फाइनल मुकाबला भी खेला
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उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में उत्कृष्ट रहा
कोच तस्लीमा: “वुमन ऑफ द मैच जीतकर सिमरन ने इतिहास लिखा”
टीम की कोच तस्लीमा ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि—“इस विश्व कप में सिमरनजीत ने एक मैच में वुमन ऑफ द मैच बनकर नई मिसाल कायम की। वह इस स्तर पर ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली राजस्थान की पहली महिला खिलाड़ी हैं।”उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति और परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
RCA अध्यक्ष बेरवा: “पूरा देश सिमरन पर गर्व करता है”
संघ के अध्यक्ष बेरवा ने भावुक शब्दों में कहा—“सिमरनजीत कौर की इस उपलब्धि पर हमें गर्व है। उन्होंने न केवल राजस्थान का नाम रोशन किया बल्कि पूरे देश का सम्मान बढ़ाया है। हम उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देते हैं।”उनके अनुसार, यह उपलब्धि अन्य खिलाड़ियों—विशेषकर दिव्यांग प्रतिभाओं—के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
बूंदी जिले में खुशी की लहर—गाँव में जश्न का माहौल
सिमरनजीत की इस जीत से उनका गाँव बाजड और पूरा तालेड़ा उपखंड गौरवान्वित है।गाँव के लोगों ने उनके परिवार को बधाइयाँ दीं और कहा कि सिमरन बच्चों—विशेषकर बेटियों—के लिए प्रेरणा हैं।दृष्टिबाधित महिला विश्व कप में सिमरनजीत कौर का प्रदर्शन सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि साहस, मेहनत और संकल्प की मिसाल है।राजस्थान की इस बेटी ने साबित कर दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती—बाधाएँ केवल रास्ते में आने वाली चुनौतियाँ हैं, मंज़िल नहीं।सिमरन की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने न सिर्फ बूंदी बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है।





