उत्तर प्रदेश (देवरिया)
राजधानी दिल्ली के लाल किला के पास हुए धमाके में घायल हुए शिवा जयस्वाल की ज़िंदगी पहले से ही संघर्षों से भरी थी। उनके पिता पहले ही इस दुनिया से जा चुके हैं, मां कैंसर से जूझ रही है और वे चार बहनों में इकलौता भाई हैं। अब इस धमाके ने इनके परिवार पर एक और जबरदस्त हमला किया है।शिवा देवरिया जिले की एक मंडिया-व्यवसाय परिवार से आते हैं, जहाँ वे खुद रेडीमेड कपड़ों की दुकान चलाते थे। उनकी मां, माया जयस्वाल,कैंसर से पीड़ित हैं और पिता का निधन पहले ही हो चुका है। परिवार में चार बहनें–रंजना, अन्य तीन–और शिवा ही उनकी उम्मीद और सहारा थेयह परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, मगर मेहनत-और ईमानदारी से आगे बढ़ रहा था।
दिल्ली धमाका – कब, कहाँ और कैसे हुआ?
8 नवंबर की रात, शिवा बस से दिल्ली गए थे कपड़े खरीदने के लिए। उसी समय लालकिला के पास विस्फोट हुआ। जानकारी मिली कि वहाँ खड़ी कार अचानक फटा और भारी संख्या में लोग घायल हुए। शिवा के जख्मी होने की खबर टीवी पर तब चली, जब उनके परिवार को पता चला कि उनका बेटा उसमें शामिल है।
घायल होने के बाद: अस्पताल में जंग, घर में चिंता
घटना के बाद शिवा को दिल्ली के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहाँ उनकी हालत अभी स्थिर बताई जा रही है। उनके घर-वाले तत्काल दिल्ली रवाना हुए।पर परिवार की इस तैयारी ने उन्हें एक नई पीड़ा दे दी–मां की बीमारी, पिता की अनुपस्थिति, बहनों की जिम्मेदारी और अब यह बड़ा हादसा।शिवा के बहन-रंजन ने बताया कि “बॉस से कॉल आई कि हमारा बेटा जख्मी है”–और फिर पूरे परिवार में चिंता और आशंका की लहर दौड़ गई।
समर्थन की जरूरत: अब सिर्फ माफी नहीं, मदद चाहिए
शिवा का मामला सिर्फ एक जख्मी युवक की कहानी नहीं है–यह है उस परिवार की जो एक बेटे-भाई पर सब उम्मीदें लटकाए है। अब उन्हें चाहिए है–
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तुरंत एवं उच्च स्तरीय चिकित्सा सहायता
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अर्थ-सहायता ताकि परिवार को आर्थिक विघ्न न हो
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मानसिक सहारा-उन चार बहनों के लिए, जो अब भी भाई के ठीक होने के लिए इंतज़ार कर रही हैं।
क्या सीख मिलती है?
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छोटे-से-छोटे व्यवसाय और परिवार भी आतंकवाद जैसी घटनाओं से अछूते नहीं हैं।
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ऐसी कठिन घड़ी में समुदाय-सहायता अहम भूमिका निभा सकती है।
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हमें सिर्फ नफरत नहीं, बल्कि अपने बीच के लोगों के लिए इंसानियत भी जतानी चाहिए।
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