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108 एम्बुलेंस डिलीवरी

108 एम्बुलेंस डिलीवरी: बानसूर अस्पताल की लापरवाही, बीच रास्ते एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

जयपुर, संवाददाता: मामराज मीणा

 

जयपुर ग्रामीण के विराटनगर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 108 एम्बुलेंस डिलीवरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को उजागर कर दिया। विधानसभा बानसूर क्षेत्र में रात्रि करीब 10 बजे एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा की हालत में अस्पताल से रेफर कर दिया गया, लेकिन समय रहते इलाज नहीं मिला।

 

बानसूर अस्पताल की लापरवाही

बानसूर के उप जिला अस्पताल (SDH) में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा कर्मियों की लापरवाही एक महिला और उसके होने वाले बच्चे के लिए गंभीर खतरा बन सकती थी। महिला प्रसव पीड़ा से जूझ रही थी, इसके बावजूद उसे तुरंत कोटपूतली के लिए रेफर कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने 108 एम्बुलेंस डिलीवरी को मजबूरी बना दिया।

 

रेफर करने में जल्दबाजी का आरोप

परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि बानसूर अस्पताल में मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बजाय जल्दबाजी में रेफर कर दिया जाता है। यदि रास्ते में कोई अनहोनी हो जाती, तो महिला और नवजात की जान भी जा सकती थी। यह मामला 108 एम्बुलेंस डिलीवरी के जरिए सिस्टम की गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है।

 

108 एम्बुलेंस में गूंजी किलकारी

रेफर किए जाने के बाद जैसे ही एम्बुलेंस रवाना हुई, महज 10 मिनट बाद महिला की प्रसव पीड़ा असहनीय हो गई। बीच रास्ते में एम्बुलेंस में ही डिलीवरी की नौबत आ गई और 108 एम्बुलेंस डिलीवरी के दौरान एक बच्ची ने जन्म लिया। एम्बुलेंस में किलकारी गूंज उठी, जिसने एक संकट को खुशी में बदल दिया।

 

EMT और पायलट की सूझबूझ

इस मुश्किल घड़ी में 108 एम्बुलेंस स्टाफ EMT मनोज यादव और पायलट रणवीर सिंह ने सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने एम्बुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोककर बीच रास्ते में ही सकुशल प्रसव करवाया। उनकी तत्परता से 108 एम्बुलेंस डिलीवरी सफल रही और एक बड़ी अनहोनी टल गई।

 

जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित

प्रसव के बाद महिला और नवजात बच्ची दोनों पूरी तरह स्वस्थ पाए गए। बाद में उन्हें कोटपूतली स्थित बीडीएम जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां चिकित्सकों ने भी उनकी स्थिति को सामान्य बताया। इस तरह 108 एम्बुलेंस डिलीवरी एक सकारात्मक उदाहरण भी बनी।

 

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

हालांकि यह घटना एम्बुलेंस स्टाफ की प्रशंसा का कारण बनी, लेकिन बानसूर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर गई। अगर समय रहते अस्पताल में ही प्रसव की व्यवस्था होती, तो 108 एम्बुलेंस डिलीवरी की नौबत ही नहीं आती।

 

कुल मिलाकर, विराटनगर–बानसूर क्षेत्र की यह 108 एम्बुलेंस डिलीवरी एक ओर जहां EMT और पायलट की मानवता और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की लापरवाही को भी उजागर करती है। यह मामला स्वास्थ्य विभाग के लिए चेतावनी है कि रेफर करने से पहले मरीज की स्थिति का सही आकलन किया जाए।

 

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