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शिक्षा की आड़ में व्यापार! मालपुरा में स्कूल संचालक का बड़ा खुलासा — बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़

मालपुरा से ई न्यूज की विशेष पड़ताल रिपोर्ट — शिक्षा अब सेवा नहीं, व्यापार बन चुकी है — और इसका सबसे जीवंत उदाहरण है मालपुरा का एक चर्चित निजी स्कूल संचालक। वही संचालक, जिसकी बस की स्टेयरिंग फेल होने की खबर ने आज पूरे कस्बे में हड़कंप मचा दिया था। यह वही स्कूल है जहां बच्चों की सुरक्षा से लेकर शिक्षा तक सब कुछ कागजों में फिट और जमीन पर फेल नजर आता है। ई न्यूज की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि यह संचालक शिक्षा की आड़ में मोटी कमाई का ऐसा नेटवर्क खड़ा कर चुका है, जो नियमों और नैतिकता दोनों को ठेंगा दिखाता है।

 

मोटे मुनाफे की दुकान बनी शिक्षा

स्कूल प्रशासन द्वारा अपने स्कूल की ड्रेस, प्रिंटेड कॉपियां, स्टेशनरी तक खुद बेचने का ठेका रखा गया है। बच्चों के अभिभावकों को बाहर से कोई भी सामान खरीदने की अनुमति नहीं। यानी शिक्षा के नाम पर बाजार भी खुद का और मुनाफा भी खुद का। एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया — > “हमसे स्कूल कॉपी दोगुने दामों में दी जाती है जो बाजार में उसकी आधी कीमत पर मिलती है। मना करो तो बच्चे को ताने दिए जाते हैं कि ‘आपके माता-पिता स्कूल का नियम नहीं मानते।’”

 

सुरक्षा नियमों की उड़ रही धज्जियां

नियमानुसार, स्कूल बसों की फिटनेस, इंश्योरेंस, पोल्यूशन सर्टिफिकेट, अग्निशमन उपकरण और प्रशिक्षित ड्राइवर-कंडक्टर अनिवार्य हैं। मगर इस स्कूल की बसों में कुछ भी बमुश्किल ही मिलेगा। सूत्रों के अनुसार, तीन स्कूलों के सैकड़ों बच्चों को मात्र छह पुरानी बसों और ऑटो रिक्शों से ढोया जाता है। ऑटो में बच्चों को इस तरह ठूंसा जाता है जैसे जानवरों को ढोया जा रहा हो। बस हादसे के बाद ई न्यूज की खबर से यह भी सामने आया कि विद्यालय में कई खामियां हैं, जो नियमों के विपरीत हैं।

कस्बे के एक पूर्व परिवहन अधिकारी ने बताया — > “बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐसे स्कूलों के खिलाफ मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 190(2) और आरटीओ नियम 196 के तहत बसों को सीज कर संचालक पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।”

 

एक ही बिल्डिंग में कॉलेज! यूजीसी के नियमों की धज्जियां

ई न्यूज की जांच में सामने आया कि यही स्कूल संचालक अब शिक्षा का “कॉर्पोरेट मॉडल” चला रहा है। जिस बिल्डिंग में स्कूल चल रहा है, उसी में एक कॉलेज भी संचालित किया जा रहा है! यूजीसी (University Grants Commission) के Regulation 2018 के अध्याय 5(3) के अनुसार — > “किसी भी संस्थान में प्राथमिक या माध्यमिक शिक्षा संस्थान के साथ उच्च शिक्षा संस्थान एक ही परिसर या भवन में संचालित नहीं किए जा सकते।” लेकिन यहां तो वही हो रहा है! कॉलेज के नाम पर केवल दस पंद्रह डमी एडमिशन लेकर फर्जी तरीके से कॉलेज को “ऑन पेपर” जीवित रखा गया है। दरअसल, असल में कॉलेज बंद है, लेकिन UGC व राज्य विश्वविद्यालय को यह सूचना तक नहीं दी गई। इस तरह यह संचालक Education Fraud की श्रेणी में आ चुका है।

 

डमी एडमिशन का बड़ा खेल

यह संस्थान हर साल कुछ छात्रों के डमी एडमिशन दिखाकर कॉलेज की मान्यता बचाए रखता है। बताया जाता है कि कॉलेज में न तो कोई नियमित फैकल्टी है, न लैब्स, न लाइब्रेरी, फिर भी कॉलेज के नाम पर फीस वसूली जारी है। शिक्षा विभाग के अनुसार — > “Rajasthan Non-Government Educational Institutions Act, 1989 की धारा 16 और 17 के तहत किसी भी संस्था द्वारा गलत जानकारी देकर संचालित शिक्षण संस्थान की मान्यता निरस्त की जा सकती है।”

 

शिक्षा विभाग की भूमिका संदिग्ध

अब सवाल उठता है — क्या शिक्षा विभाग को इन सबकी जानकारी नहीं है? एक तरफ स्कूलों पर नियमों की पुस्तिकाएं थोप दी जाती हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे “सेटिंग वाले” संचालक खुलेआम नियम तोड़ रहे हैं। स्कूल निरीक्षण की फाइलें धूल फांक रही हैं और अधिकारी “नोटिस भेजा है” कहकर इतिश्री कर लेते हैं।

 

अभिभावकों का फूटा गुस्सा

बच्चों की सुरक्षा और लापरवाह प्रबंधन को लेकर अभिभावकों में आक्रोश है। एक अभिभावक ने कहा — > “हम बच्चों को स्कूल पढ़ने भेजते हैं, लेकिन डर इस बात का रहता है कि कहीं बस या ऑटो की लापरवाही से हादसा न हो जाए। शिक्षा विभाग को इन पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

 

प्रशासन पर सवाल

प्रशासन पर यह बड़े सवाल उठते हैं कि — क्या शिक्षा विभाग ऐसे संस्थानों की नियमित जांच करेगा? क्या इन संचालकों पर यूजीसी और राज्य शिक्षा बोर्ड के नियमों के उल्लंघन में कार्रवाई होगी? क्या ऐसे स्कूलों की बसों को फिटनेस जांच के बिना सड़क पर उतरने की अनुमति दी जाएगी?

 

शिक्षा के नाम पर धोखा

मालपुरा जैसे कस्बे में जहां शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की जरूरत है, वहीं कुछ संचालकों ने इसे कमाई का साधन बना दिया है। न यूजीसी का डर, न शिक्षा विभाग का निरीक्षण, न बच्चों की सुरक्षा की चिंता। “किताबों के पन्नों पर शिक्षा, और सड़कों पर मौत का सफर — यही है इस स्कूल की असली तस्वीर।”

 

ई न्यूज की टीम ने कहा —> “जब तक शिक्षा के नाम पर व्यापार करने वाले ऐसे संचालक उजागर नहीं होंगे, तब तक हमारी मुहिम जारी रहेगी।” — ई न्यूज स्पेशल रिपोर्ट, मालपुरा

 

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