अंता | संवाददाता: घनश्याम दाधीच
अंता कस्बे में कई निजी शिक्षण संस्थाओं द्वारा अपनी बाल वाहिनी में अनफिट वाहन और आवश्यकता से अधिक बच्चों को बैठाना आम समस्या बन गई है। कई वाहनों में बच्चों की संख्या उनकी क्षमता से दोगुनी या तिगुनी हो रही है, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा वाहनों को बाल वाहिनी के रूप में इस्तेमाल करने और रंग संकेत देने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन कई निजी स्कूलों ने इन नियमों की धज्जियां उड़ाई हुई हैं।

अनफिट वाहन और सुरक्षा के अभाव में हादसों का खतरा
अंता में कई स्कूलों ने अनफिट मैजिक और इको कारों को बाल वाहिनी के रूप में इस्तेमाल किया है। कई वाहन चालकों के पास वैध लाइसेंस नहीं है, और कुछ वाहन एक से अधिक स्कूलों में उपयोग हो रहे हैं। पूर्व में कस्बे के निकट एक दर्दनाक हादसा हुआ था जिसमें एक मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। वहीं नेशनल हाईवे 27 पर डेरु माताजी के पास बडवा गांव जाते समय एक नाबालिग द्वारा वाहन चलाए जाने की घटना भी सामने आई थी, जिसमें कई स्कूली बच्चे सवार थे। यदि समय पर रोकथाम नहीं हुई होती, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की प्रवृत्ति
कई स्कूल अपनी मोटी कमाई के चक्कर में बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर रहे हैं। छोटे बच्चों को क्षमता से अधिक बैठाकर वाहनों को फर्राटे से दौड़ाया जा रहा है। इस कारण किसी भी समय गंभीर दुर्घटना हो सकती है। वाहनों पर न तो स्कूल का नाम अंकित है और न ही कोई मोबाइल नंबर या संपर्क विवरण, जिससे किसी तरह की आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।
प्रशासन और परिवहन विभाग की उदासीनता
स्थिति यह है कि पुलिस और परिवहन विभाग भी इस गंभीर समस्या से अनभिज्ञ बने हुए हैं। उनका यह निष्क्रिय रवैया निजी स्कूल संचालकों को और भी निडर बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाल वाहिनी में सुरक्षा नियमों का पालन न करने से बच्चों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है। ऐसे में संबंधित विभागों को सख्ती से कार्यवाही करनी चाहिए।
स्कूल संचालकों की जिम्मेदारी
सभी निजी स्कूलों को चाहिए कि वे अपनी बाल वाहिनी में लगे वाहनों की जांच और निरीक्षण कराएँ। वाहन चालकों का लाइसेंस और वाहन फिटनेस सुनिश्चित करना आवश्यक है। साथ ही, वाहन पर स्कूल का नाम और संपर्क नंबर स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। इसके अलावा, बच्चों की संख्या वाहन की क्षमता के अनुरूप होनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देकर ही वाहनों का संचालन किया जाना चाहिए।
हादसों से बचाव के लिए सख्त कदम जरूरी
अगर प्रशासन समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता है तो भविष्य में बड़ा हादसा होना निश्चित है। सभी स्कूल संचालकों, पुलिस प्रशासन और परिवहन विभाग को मिलकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने होंगे। बाल वाहिनी में लगे वाहनों की नियमित जांच, लाइसेंस सत्यापन और बच्चों की संख्या नियंत्रण ही भविष्य में दुर्घटनाओं से बचाव कर सकता है।
अंता कस्बे में निजी स्कूलों द्वारा बाल वाहिनी में किए जा रहे अनियमित संचालन ने बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर दिया है। प्रशासन और संबंधित विभागों की अनदेखी से यह समस्या और बढ़ रही है। सभी स्कूलों को निर्देशित किया जाना चाहिए कि वे सुरक्षा नियमों का पालन, वाहन फिटनेस और बच्चों की संख्या नियंत्रण सुनिश्चित करें। केवल इस तरह ही बच्चों के भविष्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।





