नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शुक्रवार शाम अचानक तनावपूर्ण माहौल बन गया जब डॉ. बी.आर. आंबेडकर सेंट्रल लाइब्रेरी के बाहर लगे फेस रिकॉग्निशन सिस्टम को छात्रों ने उखाड़कर तोड़ दिया। इस पूरे विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व जेएनयू छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने किया, जिनका कहना है कि लाइब्रेरी के अंदर प्रवेश के लिए फेस रिकॉग्निशन तकनीक का इस्तेमाल छात्रों की निजता का खुला उल्लंघन है। छात्रों ने दावा किया कि यह उपकरण चुनाव प्रक्रिया के दौरान बिना अनुमति और चुपके से लगाए गए थे, जिस पर पहले से ही आपत्ति दर्ज कराई गई थी लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई。
लाल सलाम के नारे और तोड़फोड़ के वीडियो ने बढ़ाया विवाद
पूरा मामला तब और ज्यादा सुर्खियों में आ गया जब सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में छात्रों को ‘लाल सलाम’ के नारे लगाते हुए और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम को पूरी तरह उखाड़ते हुए देखा गया। वीडियो में सुरक्षा कर्मियों को छात्रों को रोकने की कोशिश करते हुए भी देखा गया, लेकिन भीड़ इतनी उग्र थी कि सुरक्षाकर्मी उपकरण बचाने में असफल रहे। छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सिस्टम को लगाने के लिए छात्र समुदाय से कोई चर्चा या सहमति नहीं ली, इसलिए इसे हटाना उनका अधिकार था। इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर छात्रों के समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएँ तेज़ी से बढ़ गई हैं。
छात्र नेताओं का आरोप — निगरानी और निजता पर हमला
JNU छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने मीडिया में बयान देते हुए कहा कि प्रशासन कैंपस में छात्रों की हर गतिविधि पर निगरानी रखना चाहता है, जिससे लोकतांत्रिक माहौल दबाया जा सके। उनका आरोप है कि पहले ही फेस रिकॉग्निशन सिस्टम की जांच के लिए गठित समिति को रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था, लेकिन समिति की रिपोर्ट आए बिना ही इन उपकरणों को लाइब्रेरी में सक्रिय कर दिया गया। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन निजता से जुड़े मुद्दों पर संवाद नहीं करेगा और निगरानी बढ़ाने की कोशिश जारी रखेगा तो आंदोलन और भी बड़ा हो सकता है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया — सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पर उच्च स्तरीय जांच
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और तत्काल रिपोर्ट मांगी है। प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना एक बड़ा अपराध है और तोड़फोड़ के जिम्मेदार छात्रों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध हर छात्र का अधिकार है, लेकिन हिंसा और तोड़फोड़ विश्वविद्यालय की नीति के बाहर है और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक दोषियों की पहचान और मामले की कानूनी दिशा पर कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी。
कैंपस में बढ़ी टकराव की आशंका, आगे क्या?
घटना के बाद कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है और संभावना है कि आने वाले दिनों में छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच टकराव और बढ़ सकता है। कुछ छात्र संगठनों ने आगामी दिनों में बड़े पैमाने पर विरोध मार्च की घोषणा की है, जबकि दूसरी तरफ प्रशासन पूरे विश्वविद्यालय में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की योजना पर विचार कर रहा है। तकनीकी निगरानी बनाम निजता का मुद्दा अब केवल जेएनयू तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह पूरे देश के उच्च शिक्षा संस्थानों में होने वाली डिजिटल मॉनिटरिंग पर बहस को और तेज कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह विवाद संवाद से सुलझता है या किसी और बड़े आंदोलन का रूप लेता है।
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