टोंक, संवाददाता: कमलेश प्रजापत
टोंक जिले के मालपुरा क्षेत्र में तेजी से चर्चा का विषय बनता जा रहा है। क्षेत्र में संचालित कई निजी शिक्षण संस्थानों में नियमों की अनदेखी कर बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के नाम पर संचालित ये संस्थान केवल फीस वसूली तक सीमित रह गए हैं, जबकि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।
जर्जर स्कूल वाहन और ओवरलोडिंग
malpura private school irregularities का सबसे गंभीर पहलू स्कूल वाहनों से जुड़ा है। कई निजी स्कूल बच्चों को लाने–ले जाने के लिए जर्जर हालत के वाहन उपयोग में ले रहे हैं, जिनकी फिटनेस और सुरक्षा मानक पूरी तरह संदिग्ध हैं। इन वाहनों में क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जा रहा है। संकरे रास्तों और व्यस्त सड़कों पर ऐसे वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं, लेकिन स्कूल प्रबंधन इस ओर आंखें मूंदे हुए है।
सुरक्षा नियमों की खुली अनदेखी
malpura private school irregularities के तहत यह भी सामने आया है कि कई स्कूलों में वाहनों की नियमित जांच नहीं कराई जाती। न तो ड्राइवरों के दस्तावेजों की समय-समय पर जांच होती है और न ही बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य आवश्यक नियमों का पालन किया जाता है।स्कूल बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, फायर सेफ्टी उपकरण और प्रशिक्षित सहायक जैसे जरूरी इंतजाम भी कई जगह नदारद हैं, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
malpura private school irregularities केवल परिवहन तक सीमित नहीं हैं। कई निजी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी अधूरी पाई गई हैं। स्वच्छ शौचालय, सुरक्षित भवन, खेल मैदान, पीने का स्वच्छ पानी और आपातकालीन सुरक्षा इंतजामों का अभाव बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और जीवन पर भी सवाल खड़े करता है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल
malpura private school irregularities को लेकर सबसे बड़ा सवाल प्रशासन की भूमिका पर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासन की ओर से कोई ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही। यदि समय रहते इन संस्थानों की गंभीरता से जांच नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
अभिभावकों की मांग और चेतावनी
malpura private school irregularities को लेकर अभिभावकों और आमजन ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि निजी शिक्षण संस्थानों की नियमित जांच की जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का भविष्य और जीवन किसी भी कीमत पर जोखिम में नहीं डाला जा सकता। यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो वे आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।
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