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हरनावदाशाहजी में श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन संत अभिराम दास त्यागी ने जीवन–परिवर्तनकारी संदेश दिए

हरनावदाशाहजी, कस्बा | संवाददाता: कामरान अली

 

हरनावदाशाहजी, कस्बे के मेला मैदान स्थित बाग वाले हनुमान मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस रविवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। भारी संख्या में जुटे भक्तों के बीच संत महामंडलेश्वर अभिराम दास त्यागी जी ने दिव्य कथा वाचन और जीवन–परिवर्तनकारी संदेश देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

 

संत अभिराम दास त्यागी के जीवन–परिवर्तनकारी संदेश

संत अभिराम दास त्यागी ने कथा में सत्य, विवेक, सुरक्षा और माता–पिता के संस्कार पर बल दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य है, और जो माता–पिता की सेवा करते हैं वे भगवान के समान पूजनीय होते हैं। उन्होंने उपस्थित भक्तों को बताया कि माँ हमारी प्रथम गुरु हैं, जो बच्चों को नैतिक और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करती हैं। संत ने यह भी सिखाया कि भगवान के लिए समय निकालना जीवन में आत्मिक कमाई है। जैसे हम परिवार के लिए समय और श्रम समर्पित करते हैं, वैसे ही भगवान के लिए समय निकालना अनिवार्य है।

 

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गुरूदेव के मधुर भजनों से मंत्रमुग्ध हुआ पंडाल

रविवार की कथा में गुरूदेव ने अपने मधुर और भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की यह शृंखला पंडाल को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। भक्तों ने तालियों, जयकारों और गहरे श्रद्धाभाव के साथ भजनों का उत्साहपूर्वक साथ दिया।

 

भक्तों की बड़ी उपस्थिति

महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा का रसपान करने पहुंचे। कथा प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक आयोजित की जा रही है। उपस्थित जनों ने गुरूदेव के उपदेशों और भजनों का भावविभोर होकर आनंद लिया।

 

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सत्य, विवेक और संयम का संदेश

संत ने राजा हरिश्चंद्र और जड़ भरत की कथाओं के माध्यम से सत्य के मार्ग पर अडिग रहने, विवेक, संयम और आत्मनियंत्रण का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि यह गुण जीवन में स्थायित्व और सफलता प्रदान करते हैं।

 

युवाओं के लिए सड़क सुरक्षा की सीख

गुरूदेव ने युवाओं को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। बाइक चलाते समय हेलमेट पहनने की अनिवार्यता पर जोर देते हुए उन्होंने स्वयं व्यास पीठ से हेलमेट पहनकर सुरक्षा का संदेश दिया। गुरूदेव ने कहा,
“वाहन सदैव परिवार की चिंता करते हुए चलाएं, आपकी सुरक्षा ही उनका सहारा है।”

 

संस्कार और जीवन मूल्यों पर जोर

संत ने बेटी के विवाह में भौतिक दहेज से अधिक महत्वपूर्ण अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता पर बल दिया। अच्छे संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं और पीढ़ियों को दिशा प्रदान करते हैं।

 

विशिष्ट सम्मान और प्रसादी वितरण

कथा के दौरान थानाधिकारी बृजेश सिंह चौधरी के स्थानांतरण पर उन्हें तिलक-माला पहनाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। उपस्थित जनों ने उनके सेवाभाव और कार्यकाल की सराहना की। परमानन्द जी नागर (फोर्ड वाले) ने श्रीमद्भागवत कथा आयोजन हेतु ₹1,25,000 की प्रथम बोली लगाकर मुख्य यजमान के रूप में भाग लिया। प्रसादी वितरण की व्यवस्था अध्यापक कमलेश कुशवाह एवं मधू विजयवर्गीय ने की। तृतीय दिवस पूजा के यजमान रहे— मूलचंद कुशवाह, रामकल्याण कुशवाह, अध्यापक कमलेश कुशवाह, विष्णु मेहरा, रमेशचंद शर्मा चाचोरणी वाले एवं मुरलीधर शर्मा पतलोन वाले।

 

सात दिवसीय कथा का समापन

यह सात दिवसीय कथा महोत्सव 4 दिसंबर, गुरुवार को विधिवत समाप्त होगा। श्रद्धालुओं ने गुरूदेव के उपदेशों और भजनों से आत्मिक आनंद प्राप्त किया और जीवन में संस्कार, सत्य और भक्ति के महत्व को समझा।

 

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