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रायसिंहनगर में बिश्नोई मंदिर अध्यक्ष पद को लेकर विवाद, संघर्ष समिति ने किया प्रदर्शन और शुरू किया अनिश्चितकालीन धरना

श्रीगंगानगर/रायसिंहनगर; संवाददाता: नरेश गोयल 


श्रीगंगानगर जिले के रायसिंहनगर कस्बे में श्री बिश्नोई मंदिर सभा के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद ने तेज़ रूप ले लिया है।मंदिर की भूमि बेचने के आरोपों के चलते बिश्नोई संघर्ष समिति ने सोमवार को जोरदार प्रदर्शन करते हुए एसडीएम कार्यालय के बाहर ज्ञापन सौंपा, और इसके बाद अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा कर दी।संघर्ष समिति के सदस्यों का आरोप है कि मंदिर की दान में मिली पवित्र भूमि को पूर्व अध्यक्ष बबलू कालीराणा ने अवैध तरीके से बेचा है।समिति का कहना है कि यह भूमि धार्मिक और सामुदायिक उपयोग के लिए थी, लेकिन व्यक्तिगत स्वार्थवश इसका रजिस्ट्री करवा दी गई, जो बिश्नोई समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ है।

 

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, रजिस्ट्री रद्द करने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की किबेची गई भूमि की रजिस्ट्री को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।साथ ही इस प्रकरण में लिप्त अधिकारियों और आरोपियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी मंदिर या धार्मिक संपत्ति से इस तरह की हेराफेरी करने की हिम्मत न करे।

 

हनुमान चाहर पक्ष के नेतृत्व में हुआ विरोध प्रदर्शन

प्रदर्शन का नेतृत्व हनुमान चाहर पक्ष द्वारा किया गया।उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज ने हमेशा ईमानदारी, सेवा और धर्म रक्षा की मिसाल कायम की है,लेकिन कुछ लोगों के निजी स्वार्थ और लालच ने समाज की छवि को धूमिल करने की कोशिश की है।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर फैलाया जाएगा।

 

मिनी सचिवालय के सामने शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना

प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति के सदस्यों ने मिनी सचिवालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।धरना स्थल पर बड़ी संख्या में बिश्नोई समाज के लोग मौजूद हैं,जो लगातार “न्याय दो – न्याय दो” और “मंदिर भूमि की रक्षा करो” जैसे नारे लगाते रहे।धरने में शामिल लोगों ने कहा कि जब तक भूमि की बिक्री रद्द नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

 

संघर्ष समिति का बयान – यह सिर्फ जमीन नहीं, आस्था का सवाल है

समिति के प्रतिनिधि सुनील जाखड़ ने कहा —“यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की आस्था और सम्मान से जुड़ा विषय है।मंदिर की भूमि किसी व्यक्ति की संपत्ति नहीं हो सकती। जो भी इसमें लिप्त है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

 

प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

धरने पर बैठे समाजजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए औरभूमि बिक्री से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि सच्चाई सामने आ सके।स्थानीय प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी

 

मंदिर प्रबंधन पर सवाल, समाज में नाराज़गी बढ़ी

इस विवाद के चलते समाज के कई वरिष्ठ सदस्यों ने भी मंदिर प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।लोगों का कहना है कि धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामुदायिक सहमति आवश्यक है।इस घटना ने बिश्नोई समाज के भीतर असंतोष और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है।रायसिंहनगर में श्री बिश्नोई मंदिर अध्यक्ष पद को लेकर चल रहा विवाद अब कानूनी और सामाजिक संघर्ष का रूप ले चुका है।धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तकमंदिर की भूमि पुनः समाज को नहीं सौंपी जाती और दोषियों को सजा नहीं मिलती।अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी शीघ्रता और गंभीरता से इस आस्था से जुड़े विवाद को सुलझाता है।

 

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