मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक व्यक्ति, जिसने खुद को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का अधिकारी बताया, ने निवेशकों और कारोबारियों से मिलकर ₹17.74 करोड़ की धोखाधड़ी की। अब मामला दिंडोशी पुलिस थाने में दर्ज किया गया है और जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है।
फर्जी अफसर की पहचान और जांच की शुरुआत
आरोपी की पहचान रुपेश प्रभाकर चौधरी के रूप में हुई है, जो अब मृत बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता मोहम्मद असलम कुरैशी ने बताया कि चौधरी ने खुद को सीनियर IB अफसर बताकर सरकारी संपर्कों का दावा किया और सस्ते फ्लैट दिलाने का झांसा दिया। उसके साथ उसकी पत्नी निक्की चौधरी, प्रभाकर शेट्टी और रोलैंड कर्काडा ने भी साजिश रची थी।
MHADA और MMRDA के फर्जी दस्तावेजों से हुआ खेल
रुपेश चौधरी ने MHADA और MMRDA के नाम पर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार करवाए। उसने नकली लेटरहेड्स, GRAS चालान और सरकारी मुहरों का इस्तेमाल किया ताकि लोग उसके झांसे में आ जाएं। उसने खुद को इतना प्रभावशाली बताया कि लाल बत्ती लगी कार में घूमता था और अधिकारियों के साथ तस्वीरें पोस्ट करता था।
IAS और पुलिस अफसरों से नजदीकी दिखाकर बनाया भरोसा
चौधरी ने अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल्स पर कई वरिष्ठ अधिकारियों और ब्यूरोक्रेट्स के साथ फोटो साझा कीं। इतना ही नहीं, उसने एक भव्य पार्टी भी आयोजित की जिसमें टीवी कलाकार, पुलिस अधिकारी और राजनेता शामिल थे। इससे उसकी विश्वसनीयता निवेशकों के बीच और मजबूत हुई।
जनवरी 2023 से जुलाई 2025 तक चला धोखाधड़ी का सिलसिला
कुरैशी और अन्य निवेशकों ने जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच करीब ₹17 करोड़ रुपये निवेश किए। सबको उम्मीद थी कि जुलाई 2025 में रजिस्ट्रेशन होगा, लेकिन उसी दिन खबर आई कि रुपेश चौधरी की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसी के बाद असल सच्चाई सामने आने लगी।
मौत पर उठे संदेह और पोस्टमॉर्टम में गड़बड़ी
शिकायतकर्ता कुरैशी ने पुलिस को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गड़बड़ियां हैं। उनके अनुसार, चौधरी के सीने पर लाल निशान पाए गए और उसकी मौत संदिग्ध लगती है। वहीं, उसकी पत्नी निक्की चौधरी पर आरोप है कि उसने मृतक के नाम पर निवेशकों के पैसे हड़प लिए।
EOW जांच में सामने आ रहे चौंकाने वाले खुलासे
आर्थिक अपराध शाखा ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में पता चला कि रुपेश चौधरी ने MHADA के उपाध्यक्ष अनिल दिग्गीकर के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाए थे। दिग्गीकर ने खुद यह स्पष्ट किया कि उनका आरोपी से कोई संबंध नहीं था।
अब पुलिस कर रही है नेटवर्क की गहराई से जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि चौधरी के संपर्क में कौन-कौन से सरकारी अधिकारी और बिचौलिए थे। EOW अब इस पूरे रैकेट की वित्तीय गतिविधियों की जांच कर रही है।
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