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निवाई में ब्रह्माकुमारीज़ का हॉलिस्टिक हेल्थ कार्यक्रम: मन, शरीर और आत्मा को संतुलित करने का संदेश

टोंक | संवाददाता: उमाशंकर शर्मा

 

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय टोंक शाखा द्वारा चलाए जा रहे हॉलिस्टिक हेल्थ अभियान के तहत निवाई में प्रभु मिलन भवन में “वैलनेस फॉर माइंड, बॉडी एंड सोल” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन मोदी धर्मशाला के निकट स्थित ब्रह्माकुमारीज़ केंद्र पर हुआ, जिसमें क्षेत्र के कई लोग शामिल हुए।

 

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता हॉलिस्टिक हेल्थ विशेषज्ञ ब्रह्माकुमारी डॉ. शुभलक्ष्मी दीदी रहीं, जिन्होंने मन, शरीर और आत्मा के संतुलन को जीवन का मूल आधार बताया। उन्होंने कहा कि “सच्ची वेलनेस बाहर से नहीं, बल्कि हमारे भीतर से प्रारंभ होती है। जब आत्मा और शरीर एक ताल पर चलते हैं, तब जीवन में शांति, सुख और संतुलन स्वतः आ जाता है।”

 

“स्वास्थ्य की शुरुआत आत्मबोध से होती है” — डॉ. शुभलक्ष्मी दीदी

दीदी ने कहा कि वास्तविक स्वास्थ्य केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक स्तर पर संतुलन से मिलकर बनता है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य स्वयं को केवल शरीर नहीं, बल्कि एक शांत, पवित्र और प्रकाशमान आत्मा के रूप में स्वीकार करता है, तब उसके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है। उनके अनुसार, राजयोग ध्यान मन को एकाग्र करता है और अस्थिर सोच को शांत बनाता है। इससे मनुष्य अपने विचारों को सशक्त बनाकर जीवन में सफलता और शांति प्राप्त कर सकता है।

 

मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर गहन चर्चा

डॉ. शुभलक्ष्मी दीदी ने बताया कि हॉलिस्टिक हेल्थ का पहला स्तंभ है—स्वस्थ विचार। यदि विचार स्वच्छ और शांत हों तो मन अपने आप प्रसन्न रहता है। उन्होंने कहा: “विचार ही भाग्य का बीज है। इसलिए यदि हमारे विचार शांति, प्रेम, करुणा, शुभभावना और शुभकामना से भरे हों, तो पूरा जीवन सकारात्मक बन जाता है।” भावनात्मक स्वास्थ्य पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि- गुस्सा, शिकायत, भय, दुख ये सभी भावनाएँ मन की ऊर्जा को कमजोर करती हैं। राजयोग के माध्यम से व्यक्ति ईश्वरीय शक्ति से अपने संस्कारों का रूपांतरण कर सकता है, जिससे नकारात्मक भावनाएँ सतोगुणी ऊर्जा में बदल जाती हैं।

 

शारीरिक स्वास्थ्य के लिए सात्त्विक जीवनशैली आवश्यक

शारीरिक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए दीदी ने कहा कि सात्त्विक भोजन, सात्त्विक वाणी और सात्त्विक कर्म शरीर को पवित्र और ऊर्जावान बनाते हैं। शाकाहारी भोजन, प्रेम से पकाया गया प्रसाद, और दिनभर सकारात्मक संकल्प शरीर को रोगमुक्त एवं संतुलित रखते हैं। उन्होंने कहा—“हॉलिस्टिक हेल्थ का अर्थ है मन में शांति, हृदय में प्रेम, शरीर में उत्साह, संबंधों में मधुरता और जीवन में पवित्रता लाना।”

 

निवाई सेवा केंद्र प्रभारी बीके रेखा दीदी ने दी आभार अभिव्यक्ति

कार्यक्रम के अंत में निवाई सेवा केंद्र प्रभारी ब्रह्माकुमारी रेखा दीदी ने सभी उपस्थित भाई–बहनों का धन्यवाद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की सकारात्मक ऊर्जा और सहयोग के कारण कार्यक्रम सफल रहा। उन्होंने पाँच स्तंभों —

  1. ईश्वरीय ज्ञान

  2. राजयोग

  3. व्यायाम

  4. सकारात्मक सोच

  5. सात्त्विक जीवनशैली

को जीवन का आधार बताते हुए कहा कि यदि ये तत्व अपनाए जाएँ तो जीवन सहज, स्वस्थ और सुखमय बन सकता है।

 

राजयोग अभ्यास और एक्सरसाइज का प्रदर्शन

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी गुंजन दीदी ने सभी को राजयोग ध्यान का अभ्यास करवाया। उन्होंने व्यायाम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि मानसिक और शारीरिक दोनों स्वास्थ्य के लिए नियमित योग आवश्यक है। उन्होंने बताया कि हॉलिस्टिक हेल्थ अभियान 10 दिसंबर 2025 तक चलेगा। शहर का कोई भी संस्थान या समूह इस निःशुल्क सेवा का लाभ लेने के लिए स्थानीय ब्रह्माकुमारीज़ सेवा केंद्र से संपर्क कर सकता है। कार्यक्रम में संस्थान के सदस्यों सहित आस-पास के कई भाई-बहन उपस्थित रहे।

 

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