अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं भारत के ग्रामीण विकास की रीढ़ बन रही हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने साफ कहा कि आने वाले 15 वर्षों में देश में अमूल जैसी कम से कम 20 मजबूत सहकारी संस्थाएं खड़ी होंगी, जो किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ देंगी।
सहकारी सम्मेलन में अमित शाह का बड़ा बयान
हरियाणा के पंचकूला में आयोजित सहकारी सम्मेलन में अमित शाह ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से कृषि और पशुपालन को जोड़कर देश में बड़े पैमाने पर रोजगार और समृद्धि लाई जा सकती है। अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।
अमूल मॉडल की ताकत और सहकारिता का आर्थिक प्रभाव
अमूल आज गुजरात में 36 लाख से अधिक महिला दुग्ध उत्पादकों को सालाना लगभग 90 हजार करोड़ रुपये वितरित करती है। यदि यही दूध सामान्य बाजार में बिके, तो इसकी कीमत मात्र 12 हजार करोड़ रुपये होती। यही अंतर अमूल जैसी सहकारी संस्थाओं की असली ताकत दिखाता है।
कृषि, पशुपालन और सहकारिता का मजबूत गठजोड़
अमित शाह ने कहा कि देश की लगभग 70% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और उनकी आजीविका कृषि व पशुपालन पर निर्भर है। जब इन क्षेत्रों को सहकारिता से जोड़ा जाता है, तो अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं करोड़ों लोगों को न केवल रोजगार देती हैं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी बनाती हैं।
नई कृषि नीति और सतत खेती की दिशा
सरकार की नई कृषि नीति कम पानी, कम केमिकल और कम जोखिम पर आधारित है। वैज्ञानिक सिंचाई, प्राकृतिक खेती, मिट्टी परीक्षण और डिजिटल कृषि मिशन जैसे कदम अमूल जैसी सहकारी संस्थाओं को और मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकारी पहल
2014 के बाद कृषि बजट 22 हजार करोड़ से बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। ग्रामीण विकास बजट भी दोगुना से ज्यादा हुआ। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, e-NAM और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड जैसी योजनाएं अमूल जैसी सहकारी संस्थाओं को सपोर्ट कर रही हैं।
हरियाणा की भूमिका: कृषि, दूध और खेल
अमित शाह ने कहा कि हरियाणा ने हमेशा देश की खाद्य सुरक्षा, दूध उत्पादन और खेलों में अहम योगदान दिया है। अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों की आय को नई ऊंचाई दे सकती हैं।
आने वाले 15 वर्षों में 20 अमूल जैसी संस्थाएं
अमित शाह ने भरोसा जताया कि आने वाले 15 वर्षों में देश में अमूल जैसी कम से कम 20 सहकारी संस्थाएं खड़ी होंगी। ये संस्थाएं किसानों को उनकी उपज का पूरा मुनाफा दिलाने का काम करेंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएंगी।
सहकारिता आंदोलन का भविष्य
भारत में सहकारिता आंदोलन 125 साल पुराना है, लेकिन सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद इसे नई दिशा मिली है। अमूल जैसी सहकारी संस्थाएं ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को जमीन पर उतार रही हैं। सहकारिता से जुड़ी और खबरें आप हमारे देश सेक्शन में पढ़ सकते हैं।
सोशल मीडिया पर हमें फॉलो करें
देश की सहकारिता नीति, किसानों से जुड़े बड़े फैसले, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के अहम बयान, अमूल मॉडल से जुड़ी अपडेट्स, कृषि और पशुपालन क्षेत्र की ग्राउंड रिपोर्ट, सहकारी सम्मेलनों की पूरी कवरेज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी हर बड़ी खबर सबसे पहले, सटीक और भरोसेमंद तरीके से पाने के लिए हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें।
Instagram:
https://instagram.com/enewsbharat
Facebook:
https://facebook.com/enewsbharat
X (Twitter):
https://x.com/eNewsRajasthan
YouTube (Subscribe):
https://youtube.com/@enewsbharat
यहां आपको मिलेंगे – कृषि, सहकारिता और डेयरी सेक्टर से जुड़ी बड़ी खबरें, अमूल जैसी सहकारी संस्थाओं पर एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े सरकारी फैसले, सहकारी सम्मेलनों की ग्राउंड रिपोर्ट, ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ी गहराई से की गई पत्रकारिता और नीति निर्धारकों के अहम बयान।
eNewsBharat के साथ जुड़े रहें
अमूल मॉडल, सहकार से समृद्धि अभियान, किसानों और पशुपालकों के हित में लिए गए फैसले, सहकारिता मंत्रालय की पहल, ग्रामीण विकास से जुड़ी हर अहम राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय अपडेट सबसे पहले जानने के लिए eNewsBharat से जुड़े रहें।
आपका भरोसा ही हमारी ताकत है — हम आगे भी आपको तेज़, सटीक और निष्पक्ष खबरें लगातार पहुंचाते रहेंगे।
अधिक खबरों के लिए पढ़ें -> eNews-bharat
#अमूल_जैसी_सहकारी_संस्थाएं #AmitShah #सहकार_से_समृद्धि #AmulModel #कृषि_समाचार #CooperativeMovement





