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ISRO Satellite Launch

ISRO Satellite Launch: भारत से सबसे भारी उपग्रह 6100kg का ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सफलतापूर्वक लॉन्च

श्रीहरिकोटा | आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से आज ISRO satellite launch के तहत अमेरिकी सैटेलाइट ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को LVM3-M6 रॉकेट द्वारा अंतरिक्ष में स्थापित किया गया। यह उपग्रह 6100 किलोग्राम का है, जो अब तक भारत द्वारा लॉन्च किया गया सबसे भारी सैटेलाइट है। लॉन्च सुबह 8:55:30 बजे हुआ, जिसे पहले 8:54 बजे निर्धारित किया गया था। सुरक्षा और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए लॉन्च समय में 90 सेकेंड की देरी की गई।

 

इसरो के अधिकारियों ने बताया कि इस लॉन्च में सभी प्रोटोकॉल का पालन किया गया। हजारों दर्शक और मीडिया कर्मी श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र में मौजूद थे। लॉन्च की लाइव कवरेज में रॉकेट के प्रत्येक चरण की जानकारी दी गई।

 

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ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 की विशेषताएँ और उद्देश्य

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 एक नेक्स्ट-जेन कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी के किसी भी हिस्से से स्मार्टफोन और मोबाइल उपकरणों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना है। यह 4G और 5G वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, मैसेजिंग, स्ट्रीमिंग और डेटा सेवाओं के लिए सक्षम है।

 

इसके जरिए दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होगी। AST स्पेसमोबाइल ने इसे दुनिया भर में सेलुलर ब्रॉडबैंड देने के लिए विकसित किया है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 शिक्षा, स्वास्थ्य, सोशल नेटवर्किंग और व्यवसाय के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा।

 

LVM3-M6 रॉकेट और बाहुबली रॉकेट की तकनीकी जानकारी

LVM3-M6 रॉकेट का कुल वजन 640 टन है। यह शक्ति, क्षमता और परफॉर्मेंस में भारत का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है। इसे आम जनता और मीडिया ने लोकप्रिय फिल्म ‘बाहुबली’ से प्रेरित होकर ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा। यह 43.5 मीटर ऊँचा तीन-चरणों वाला रॉकेट है। इसमें दो S200 सॉलिड बूस्टर और क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल किया गया है। लॉन्च के बाद रॉकेट के प्रत्येक चरण ने अपनी भूमिका निभाई, जिससे उपग्रह सुरक्षित रूप से लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में पहुंचा।

 

LVM3-M6 रॉकेट ने पिछले मिशनों में भी सफलता हासिल की है। 2023 में चंद्रयान-3 के मिशन को सफलतापूर्वक चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचाया गया था। इसके अलावा चंद्रयान-2 और OneWeb मिशन में भी इसका इस्तेमाल हुआ।

 

सैटेलाइट का अंतरिक्ष में अलग होना और ऑर्बिट विवरण

लॉन्च के 15 मिनट बाद ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट रॉकेट से अलग होकर 520 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित हो गया। इस दौरान ISRO ने यह सुनिश्चित किया कि सैटेलाइट अन्य सक्रिय उपग्रहों से टकराए नहीं। उपग्रह की सुरक्षित स्थापना से इसके संचालन के लिए पर्याप्त ऊर्जा और कनेक्टिविटी उपलब्ध है। यह अंतरिक्ष में अपनी निर्धारित轨 path पर स्थिर रहेगा और पृथ्वी पर कहीं भी सेवाएं प्रदान करेगा।

 

ISRO और AST स्पेसमोबाइल का अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इस मिशन में अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल और ISRO के बीच कॉमर्शियल समझौता शामिल है। AST स्पेसमोबाइल के CEO एबेल एवेलन ने बताया कि उनका उद्देश्य सेलुलर ब्रॉडबैंड सेवा दुनिया के हर कोने में पहुंचाना है। कंपनी ने पहले ही सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड-1 के जरिए 5 सैटेलाइट लॉन्च कर चुके हैं। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अब इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो वैश्विक स्तर पर मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

 

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 से वैश्विक कनेक्टिविटी और सामाजिक लाभ

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 से दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट एक्सेस संभव होगा। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सोशल नेटवर्किंग, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं में सुधार होगा। AST स्पेसमोबाइल का दावा है कि उपयोगकर्ताओं को अपने मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर बदलने की जरूरत नहीं होगी। यह मिशन डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा। इसरो की वेबसाइट और Wikipedia – LVM3 पर मिशन की विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

 

ISRO के पिछले मिशन और उपलब्धियां

LVM3 रॉकेट अब तक 7 सफल मिशनों में इस्तेमाल हो चुका है। चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और OneWeb मिशन इसके प्रमुख सफल मिशन हैं। कुल 72 सैटेलाइट अंतरिक्ष में स्थापित किए गए। आज का ISRO satellite launch इस रॉकेट की 8वीं उड़ान और तीसरा कॉमर्शियल मिशन है। भारी भरकम वजन के कारण इसे ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा गया।

 

भविष्य के अंतरिक्ष मिशन और भारत की महत्वाकांक्षा

इस लॉन्च के सफल होने से भारत की अंतरिक्ष तकनीक और वैश्विक कनेक्टिविटी में अपनी विश्वसनीयता बढ़ गई है। भविष्य में ISRO LVM3 और अन्य लॉन्च व्हीकल्स से कई वैज्ञानिक, सामरिक और कॉमर्शियल मिशन करने की योजना बना रहा है। यह मिशन भारत को अंतरिक्ष व्यापार और डिजिटल कनेक्टिविटी में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

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