टोंक, संवाददाता: उमाशंकर शर्मा
ठंड से किसान की मौत की एक दर्दनाक घटना राजस्थान के टोडारायसिंह क्षेत्र से सामने आई है, जहां कड़ाके की सर्दी के बीच खेत की रखवाली कर रहे एक बुजुर्ग किसान की जान चली गई। यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में ठंड के मौसम में किसानों की मजबूरी और असुरक्षा को भी उजागर करती है।
घारेडा गांव में ठंड से किसान की मौत
उपखण्ड क्षेत्र के पुलिस थाना मोर अंतर्गत ग्राम पंचायत कूकड़ के गांव घारेडा में यह हृदयविदारक घटना घटी। ठंड से किसान की मौत का शिकार हुए किसान की पहचान 68 वर्षीय राधाकिशन पुत्र कल्याण भील के रूप में हुई है।
खेत की रखवाली करते समय हुआ हादसा
परिजनों के अनुसार, राधाकिशन भील रोजाना की तरह बुधवार शाम करीब 7 बजे भोजन करने के बाद खेत पर गए थे। वे गेहूं और सरसों की फसल की रखवाली के लिए खुले आसमान के नीचे रात बिताने चले गए, जहां अत्यधिक ठंड ने उनकी जान ले ली। ठंड से किसान की मौत की यह वजह प्रारंभिक तौर पर सामने आई है।

परिजनों को कैसे मिली जानकारी
जब गुरुवार सुबह राधाकिशन घर नहीं लौटे, तो उनके पुत्र धर्मराज भील चाय लेकर खेत पर पहुंचे। वहां उन्होंने अपने पिता को अचेत अवस्था में पड़ा पाया। यह दृश्य देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
सूचना मिलने पर मृतक के अन्य पुत्र रामलाल और बाबूलाल सहित परिजन मौके पर पहुंचे। सभी मिलकर राधाकिशन को उपजिला अस्पताल टोडारायसिंह अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और पोस्टमार्टम
घटना की सूचना मिलते ही मोर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम करवाया और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। ठंड से किसान की मौत के मामले में पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की।
मृतक का पारिवारिक और सामाजिक जीवन
राधाकिशन भील अपने पीछे तीन पुत्र छोड़ गए हैं। वे गांव के चौथ माता मंदिर में पूजा-अर्चना का कार्य भी करते थे और सामाजिक रूप से सक्रिय व्यक्ति माने जाते थे। ठंड से किसान की मौत ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया है।
कड़ाके की ठंड और किसानों की मजबूरी
बीते दिनों क्षेत्र में अत्यधिक ठंड पड़ने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित रहा है। 5 से 7 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी किसान खुले खेतों में रात गुजारने को मजबूर हैं, ताकि फसल को आवारा पशुओं और चोरी से बचाया जा सके। ठंड से किसान की मौत इस बात का प्रमाण है कि फसल सुरक्षा के लिए किसान अपनी जान तक जोखिम में डाल देते हैं।
प्रशासन और समाज के लिए सबक
यह घटना प्रशासन और समाज दोनों के लिए एक चेतावनी है। ठंड के मौसम में खेतों में रखवाली करने वाले किसानों के लिए सुरक्षित आश्रय, अलाव, कंबल और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है। ठंड से किसान की मौत जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
टोडारायसिंह के घारेडा गांव में हुई ठंड से किसान की मौत ने ग्रामीण जीवन की कठोर सच्चाई को सामने ला दिया है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां अन्नदाता अपनी फसल और परिवार के लिए जान की बाजी लगाने को मजबूर है।
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