अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दूसरी सरकार में पाकिस्तान के साथ रिश्तों में अचानक भारी बदलाव देखा जा रहा है। कभी पाकिस्तान को “झूठ और धोखे” वाला देश बताने वाले ट्रम्प अब पाकिस्तानी आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर को अपना “फेवरेट फील्ड मार्शल” कहने लगे हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि यह बदलाव अचानक नहीं आया—इसके पीछे पाकिस्तान की करोड़ों डॉलर की रणनीतिक लॉबिंग थी।
पाकिस्तान ने लॉबिंग पर उड़ाए 42 करोड़, व्हाइट हाउस तक पहुंच बनाई
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अप्रैल और मई 2025 में वॉशिंगटन की कई लॉबिंग फर्म्स के साथ 5 मिलियन डॉलर (लगभग 42 करोड़ रुपये) के कॉन्ट्रैक्ट किए। इन फर्म्स में वे लोग भी शामिल थे, जो कभी ट्रम्प के बेहद करीबी रहे हैं—जैसे उनके पूर्व बॉडीगार्ड और सहयोगी कीथ शिलर। 8 अप्रैल को पाकिस्तान ने ‘सीडेन लॉ LLP’ के साथ करार किया, जिसमें व्हाइट हाउस में हाई-लेवल मीटिंग्स फिक्स कराने का वादा था। कुछ ही हफ्तों बाद पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने वॉशिंगटन पहुंचकर ट्रम्प से निजी मुलाकात की।

कीथ शिलर लंबे वक्त तक डोनाल्ड ट्रम्प के बॉडीगार्ड और करीबी सहयोगी रहे हैं। वे अपनी वफादारी और चुप्पी के लिए मशहूर हैं।
नोबेल पीस प्राइज का नॉमिनेशन और मिनरल डील—ट्रम्प को खुश करने की कवायद
रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान ने खुद को ट्रम्प के पाले में लाने के लिए कई फ्रंट खोल दिए—
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ट्रम्प को भारत-पाक संघर्ष रोकने का क्रेडिट दिया
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उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया
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500 मिलियन डॉलर की मिनरल एक्सट्रैक्शन डील की
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और अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए मार्केट खोला
यह वही ट्रम्प हैं जो एक वक्त पाकिस्तान को विश्व मंच पर “धोखेबाज देश” कहते थे। लेकिन इस बार पाकिस्तान ने उनकी पसंद-नापसंद समझकर, अपनी पूरी रणनीति ट्रम्प केंद्रित बना दी।
मुनीर ने दिखाया रेयर अर्थ मिनरल्स का ब्रीफकेस
सितंबर में जनरल मुनीर व्हाइट हाउस पहुंचे और उन्होंने ट्रम्प को रेयर अर्थ मिनरल्स से भरा ब्रीफकेस दिखाया। ये वही मिनरल हैं, जिनकी वैश्विक सप्लाई पर चीन का दबदबा है—और अमेरिका इन्हें रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानता है। यह कदम पाकिस्तानी लॉबिंग का सबसे असरदार हिस्सा माना जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर सितंबर में व्हाइट हाउस पहुंचे थे, यहां उन्होंने ट्रम्प को रेयर अर्थ मिनरल्स से भरा ब्रीफकेस दिखाया था।
लॉबिंग का असर—टैरिफ घटा, रिश्ते सुधरे, भारत पर दबाव बढ़ा
लॉबिंग कॉन्ट्रैक्ट्स के कुछ ही महीनों में अमेरिका का रुख बदलता दिखने लगा। अप्रैल में पाकिस्तान पर लगाया गया 29% टैरिफ घटाकर 19% कर दिया गया वहीं भारत के लिए यह टैरिफ 50% तक बढ़ा दिया गया। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने भी खुलकर कहा कि पाकिस्तान “आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका का महत्वपूर्ण साझेदार” है और ट्रम्प की मदद से भारत-पाक तनाव कम हुआ है।
भारत ने भी लॉबिंग की, पर खर्च पाकिस्तान से 3 गुना कम
भारत ने भी कोशिश की अप्रैल में ‘SHW पार्टनर्स LLC’ और अगस्त में ‘मर्करी पब्लिक अफेयर्स’ जैसी फर्मों को हायर किया, पर पाकिस्तान के मुकाबले कम पैसा खर्च किया। परिणामस्वरूप ट्रम्प प्रशासन की नीतियां पाकिस्तान की ओर झुकती दिखीं, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा।
लॉबिस्ट क्या होता है और कैसे सरकारों को प्रभावित करता है?
लॉबिस्ट वह व्यक्ति होता है जो किसी कंपनी, संगठन या देश की ओर से सरकारी नीतियों को प्रभावित करता है। वह नेताओं, अधिकारियों और निर्णय लेने वालों तक पहुंच बनाता है, डेटा और संबंधों का इस्तेमाल कर अपने क्लाइंट को फायदा दिलाता है। उदाहरण के तौर पर—अगर किसी दवा कंपनी को सरकार से जल्दी मंजूरी चाहिए, तो वो लॉबिस्ट हायर करती है। लॉबिस्ट मंत्रियों, अधिकारियों और पॉलिसीमेकरों से मिलकर कंपनी की बात पहुंचाता है और फैसलों को प्रभावित करता है। लॉबिंग अमेरिका में पूरी तरह कानूनी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह किसी भी देश के प्रभाव को बदलने का बड़ा हथियार बन चुकी है—और पाकिस्तान ने इसे बेहद चतुराई से इस्तेमाल किया।





