टोंक, संवाददाता: केशव राज सैन
आमली मोड़, उनियारा (जिला टोंक) में नरेश मीणा प्रशासन समझौता शुक्रवार देर रात उस समय सामने आया, जब जयपुर कूच की तैयारी कर रहे नरेश मीणा और टोंक प्रशासन के बीच लंबी वार्ता के बाद सहमति बन गई। यह घटनाक्रम 31 जनवरी 2026 की रात का है, जब दोनों पक्षों के बीच तनाव के बजाय संवाद ने रास्ता निकाला।
12 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन
नरेश मीणा अपनी 12 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत थे। इन मांगों को लेकर शुक्रवार को जयपुर कूच का आह्वान किया गया था, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई थी।
जयपुर कूच से पहले बदली स्थिति
जयपुर की ओर कूच से पहले आमली मोड़ पर प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत शुरू हुई। प्रशासन की मंशा थी कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए।
प्रशासन और नरेश मीणा के बीच वार्ता
नरेश मीणा प्रशासन समझौता की दिशा में बातचीत का दौर देर रात शुरू हुआ। टोंक के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) ने मौके पर पहुंचकर हालात संभाले।
रात डेढ़ बजे तक चला संवाद
दोनों पक्षों के बीच वार्ता का दौर रात करीब डेढ़ बजे तक चला। इस दौरान कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई और समाधान के विकल्प तलाशे गए।
संभागीय आयुक्त अजमेर से हुई बातचीत
प्रशासन की ओर से ADM टोंक और अतिरिक्त एसपी टोंक ने संभागीय आयुक्त अजमेर से भी बातचीत की। सरकार के स्तर पर वार्ता के बाद ज्ञापन में शामिल सभी 12 सूत्रीय मांगों पर सहमति बन गई।
ADM टोंक और नरेश मीणा की संयुक्त घोषणा
सहमति बनने के बाद नरेश मीणा प्रशासन समझौता की आधिकारिक घोषणा ADM टोंक और स्वयं नरेश मीणा द्वारा की गई। इस घोषणा के बाद मौके पर मौजूद समर्थकों में संतोष देखने को मिला।
मौके पर रहा प्रशासनिक व पुलिस अमला
वार्ता और घोषणा के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर टोंक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टोंक, उपखंड अधिकारी उनियारा, पुलिस उपाधीक्षक उनियारा सहित भारी पुलिस जाप्ता मौके पर मौजूद रहा।
आंदोलनकारियों में दिखा संतोष
समझौते के बाद आंदोलनकारियों ने राहत की सांस ली। जयपुर कूच को फिलहाल स्थगित कर दिया गया और शांतिपूर्ण समाधान पर सहमति जताई गई।
प्रशासन ने बताया सकारात्मक पहल
प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे संवाद से समाधान की सकारात्मक पहल बताया। उनका कहना था कि बातचीत से समस्याओं का समाधान निकालना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है।
टोंक जिले की राजनीति पर असर
नरेश मीणा प्रशासन समझौता का असर स्थानीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। यह घटनाक्रम आने वाले समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
स्थानीय स्तर पर बना चर्चा का विषय
आमली मोड़ से लेकर उनियारा और टोंक तक यह समझौता चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे आंदोलन और प्रशासन के बीच संतुलन का उदाहरण मान रहे हैं।
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