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बकानी सीएचसी में एक्सपायरी दवा विवाद: संविदा कर्मी और ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी के बीच तकरार

झालावाड़ (बकानी) , संवाददाता: रमेश शर्मा

 

झालावाड़ जिले के बकानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में एक्सपायरी दवाओं को लेकर एक नया विवाद सामने आया है।डीटीओ की पोस्ट पर कार्यरत संविदा कर्मी दिनेश कुमार चौरसिया, जो वर्तमान में डी.डी.सी. वितरणव्यवस्था में तैनात हैं, ने ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी पर अमानवीय व्यवहार और अनुचित लहजे में फटकारने का आरोप लगाया है।दिनेश कुमार चौरसिया ने बताया कि 1 नवंबर को वे प्रतिदिन की तरह दवा वितरण का कार्य कर रहे थे।इस दौरान कुछ दवाइयां खत्म हो जाने पर उन्होंने स्टोर से नई दवाइयां मंगवाईं।नई दवाओं की खेप आने के बाद जब उन्होंने उन्हें चेक किया, तो उनमें से कुछ दवाओं की एक्सपायरी डेट अक्टूबर 2025 दर्ज थी, जो जल्द खत्म होने वाली थीं।कर्तव्यनिष्ठा के तहत दिनेश ने इस बात की मौखिक सूचना ब्लॉक सीएमएचओ प्रभारी डॉ. हेमंत मेहरा को दी।लेकिन उनका कहना है कि शिकायत सुनने के बजाय उन्हें डांट-फटकार लगाई गई और “बकवास मत कर, निकल जा यहां से” जैसे शब्द कहे गए।

 

संविदा कर्मी की ओर से सफाई

दिनेश चौरसिया ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने किसी भी प्रकार का अभद्र व्यवहार या अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया।उन्होंने केवल एक्सपायरी दवाइयों के संदर्भ में समय रहते कार्यवाही करने के लिए सूचना दी थी, ताकि मरीजों को नुकसान न पहुंचे।लेकिन इसके बाद उन्हें “मर्यादित भाषा का प्रयोग न करने” के आरोप में स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया।दिनेश ने कहा कि उन्होंने लिखित स्पष्टीकरण में यह भी उल्लेख किया कि“मैंने केवल अपने कर्तव्य के प्रति सजगता दिखाई थी। अगर मेरी किसी बात से कोई गलतफहमी या असुविधा हुई हो तो उसके लिए खेद व्यक्त करता हूं।”

 

ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी की प्रतिक्रिया

ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत मेहरा ने इस मामले पर कहा कि,“संविदा कर्मी मेरे पास एक्सपायरी दवाइयां लेकर आया था, लेकिन उस समय मैं कार्यालय के अन्य कार्यों में व्यस्त था।पूर्व में भी इसके द्वारा कई बार अनुशासनहीन व्यवहार किया गया है।मैंने केवल उसे मर्यादा में रहने की सलाह दी थी।”उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले की सूचना जिला चिकित्सा प्रभारी, झालावाड़ को भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई उनके निर्देशानुसार की जाएगी।

 

प्रशासन ने लिया मामला संज्ञान में

इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग में कर्मचारियों की कार्यशैली और अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है, और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।अगर संविदा कर्मी ने वाकई अनुशासनहीनता की हो तो कार्रवाई होगी, अन्यथा उसके साथ हुए व्यवहार की भी समीक्षा की जाएगी।बकानी सीएचसी का यह मामला सरकारी संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच कर्तव्यनिष्ठा और संवाद की मर्यादा पर बड़ा सवाल उठाता है।एक ओर जहां कर्मी खुद को अपने कर्तव्य के प्रति सजग बता रहे हैं, वहीं अधिकारी अनुशासनहीनता का हवाला दे रहे हैं।अब देखना यह होगा कि जिला स्वास्थ्य विभाग इस प्रकरण में क्या फैसला लेता है।

 

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