अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर चल रही बहस लगातार तीखी होती जा रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने विदेशी कर्मचारियों को “सस्ता मजदूर” बताते हुए कहा कि अमेरिका को इनकी जरूरत नहीं है। वेंस ने विपक्षी डेमोक्रेट्स पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी नीतियाँ “कम वेतन वाले प्रवासियों को लाने” पर आधारित हैं, जो अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और वेतन के लिए नुकसानदायक है।
वेंस ने कहा— “अमेरिकी मजदूरों को तकनीक से मजबूत किया जाना चाहिए, न कि सस्ते विदेशी श्रम पर निर्भर रहना चाहिए।” हालांकि उनका यह बयान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हालिया बयान से उलट माना जा रहा है, जिसमें ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका में कुछ खास क्षेत्रों में टैलेंट की कमी है।
ट्रम्प बोले— देश में कई क्षेत्रों में टैलेंट नहीं, बाहरी विशेषज्ञ जरूरी
ट्रम्प ने कुछ दिन पहले कहा था कि अमेरिका में कुछ महत्वपूर्ण नौकरियों के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने जॉर्जिया की एक बैटरी फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए बताया कि दक्षिण कोरिया की कंपनी ने 500–600 विशेषज्ञ अमेरिका भेजे थे ताकि अमेरिकी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा सके। ट्रम्प ने कहा— “बैटरी बनाना कठिन और जोखिमभरा काम है। अमेरिका में इस तरह की प्रतिभा नहीं है, इसलिए H-1B जैसा वीजा जरूरी है।” हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने सितंबर में H-1B वीजा की एप्लिकेशन फीस 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 1 लाख डॉलर कर दी थी।
रिपब्लिकन पार्टी H-1B वीजा पूरी तरह खत्म करने की तैयारी में
ट्रम्प की करीबी और रिपब्लिकन नेता मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा है कि जल्द ही एक विधेयक लाया जाएगा, जिसके तहत H-1B वीजा कैटेगरी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियाँ इस वीजा का दुरुपयोग करती हैं और अमेरिकी नौकरियों को विदेशी श्रमिकों को दे देती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगले 10 साल तक हर साल 10,000 डॉक्टरों को H-1B वीजा जारी होंगे। फिलहाल जारी 85,000 H-1B वीजाओं में से करीब 70% भारतीयों को मिलते हैं। ऐसे में यह बदलाव भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

विदेशी छात्रों पर भी अमेरिका की नज़र, इंटरव्यू रोककर कड़े नियम
विदेशी छात्रों को लेकर भी अमेरिकी सरकार की नीतियाँ सख़्त होती जा रही हैं। ट्रम्प सरकार ने हाल ही में कहा कि विदेशी छात्रों को पढ़ाई की अनुमति मिलना जारी रहनी चाहिए, क्योंकि वे अमेरिकी विश्वविद्यालयों की आर्थिक नींव को मजबूत रखते हैं। लेकिन छह महीने पहले अमेरिका ने F, M और J कैटेगरी के लिए नए वीजा इंटरव्यू अस्थायी रूप से रोक दिए थे।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दूतावासों को निर्देश दिया था कि नए शेड्यूल न बनाएं, क्योंकि सरकार छात्रों के सोशल मीडिया की गहन जांच को अनिवार्य करने जा रही है। इंटरव्यू दोबारा शुरू हुए जरूर हैं, लेकिन वेरिफ़िकेशन और सिक्योरिटी जांच अब और सख्त कर दी गई है।
विदेशी छात्रों पर ट्रम्प का यू-टर्न
ट्रम्प ने स्वीकार किया कि विदेशी छात्रों की संख्या घटाने से अमेरिका के कई कॉलेज बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा— “हम दुनिया भर से आने वाले आधे छात्रों को नहीं रोक सकते। ऐसा किया तो हमारी यूनिवर्सिटी प्रणाली ढह जाएगी।”
भारतीय छात्रों पर बड़ा असर, 70% गिरा एडमिशन
नई नीतियों और वीजा रिजेक्शन बढ़ने के कारण अमेरिका में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 70% तक गिर गई है। कई छात्र अब विकल्प के रूप में कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि H-1B और स्टूडेंट वीजा पर नीतियों की अनिश्चितता भारतीय छात्रों और पेशेवरों दोनों को प्रभावित कर रही है।






