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काल भैरव जयंती 2025: जानिए पूजा विधि, मंत्र और भैरव साधना से जुड़ी मान्यताएँ

हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष मास (अगहन मास) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव जयंती मनाई जाती है। यह दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान भैरव की उपासना से व्यक्ति जीवन के सभी संकटों, भय और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्त हो जाता है।

 

भगवान काल भैरव का स्वरूप और महत्व

काल भैरव, भगवान शिव के आठ रुद्रावतारों में से एक हैं। उन्हें समय, न्याय और धर्म के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि भगवान भैरव की कृपा से पापों का नाश होता है और कुंडली के दोष दूर हो जाते हैं। विशेष रूप से, कलयुग में भैरव साधना को सबसे प्रभावी माना गया है।

 

काल भैरव जयंती की पूजा विधि

जयंती के दिन प्रातःकाल स्नान कर भगवान भैरव की मूर्ति या चित्र के सामने गंगाजल छिड़कें। उन्हें फल, फूल, धूप, दीप और वस्त्र अर्पित करें। भगवान भैरव को उनकी प्रिय भोग वस्तु इमरती या जलेबी चढ़ाएं। इसके बाद भैरव चालीसा और भैरव अष्टकम का पाठ करें तथा आरती के साथ पूजा पूर्ण करें।

 

भगवान भैरव को प्रसन्न करने के मंत्र

मान्यता है कि भगवान भैरव के निम्न मंत्रों का जाप करने से साधक को भय, रोग और संकटों से मुक्ति मिलती है। रुद्राक्ष की माला से 108 बार मंत्र जप करना शुभ माना गया है।

1️⃣ ॐ कालभैरवाय नमः।

2️⃣ ॐ ह्रीं भैरवाय नमः।

3️⃣ ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं।

4️⃣ ॐ भ्रं कालभैरवाय सर्व बाधा निवारणाय हुं फट्।

 

हर प्रहर में भगवान को दें अर्घ्य

शास्त्रों के अनुसार, काल भैरव जयंती पर दिनभर व्रत रखना और हर प्रहर में भगवान को अर्घ्य देना अत्यंत फलदायक होता है। साधक को तीन बार “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र से जल अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन की नकारात्मकता समाप्त होती है और भैरव कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।

 

घर में पूजा करने के विशेष नियम

यदि आप मंदिर नहीं जा सकते, तो घर पर भी विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं। ध्यान रखें कि पूजा स्थल साफ-सुथरा हो और उसमें दीपक दिनभर जलता रहे। पूजा के दौरान शराब या मांसाहार का सेवन वर्जित है। भैरव जी की आरती के समय काले तिल और सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है।

 

भैरव साधना के लाभ

भैरव साधना से साधक को आत्मबल, साहस और मानसिक स्थिरता प्राप्त होती है। काल भैरव की कृपा से राहु-केतु और शनि के दोषों का प्रभाव भी कम होता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से भैरव आराधना करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और निर्भयता आती है।

 

काल भैरव जयंती और ज्योतिषीय दृष्टि

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन किया गया भैरव पूजन ग्रहदोष निवारण के लिए अत्यंत प्रभावी होता है। विशेषकर जिनकी कुंडली में शनि, राहु या मंगल का अशुभ प्रभाव है, उन्हें यह पूजा अवश्य करनी चाहिए।

 

काल भैरव जयंती न केवल एक धार्मिक पर्व है, बल्कि आत्मशक्ति और भयमुक्त जीवन की साधना का प्रतीक भी है। जो भक्त श्रद्धा और विधि से भगवान काल भैरव की आराधना करते हैं, उन्हें जीवन में सफलता, सुख और सुरक्षा प्राप्त होती है।

 

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