इस्लामाबाद | Pakistan में प्रशासनिक ढांचे को पूरी तरह बदल देने वाली बड़ी कवायद शुरू हो गई है। देश के संचार मंत्री अब्दुल अलीम खान ने संकेत दिया है कि पाकिस्तान के मौजूदा चारों प्रांतों को 12 नए हिस्सों में बांटने की तैयारी चल रही है। मंत्री के मुताबिक छोटे प्रांत बनाने से शासन में दक्षता और सुशासन लाया जा सकता है।
अब्दुल अलीम खान, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की गठबंधन सरकार में शामिल इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) से आते हैं। रविवार को शेखूपुरा में आयोजित IPP कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के बड़े प्रांत प्रशासनिक तौर पर बिखर चुके हैं, इसलिए छोटे प्रांत बनना अब वक्त की ज़रूरत है।
अब्दुल अलीम खान ने शेखूपुरा में रविवार को IPP के कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
Pakistan के प्रांतों का 12 हिस्सों में संभावित बंटवारा
हालांकि Pakistan सरकार ने अभी कोई आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया है, लेकिन जिन क्षेत्रों पर चर्चा सबसे अधिक है, वे इस प्रकार हैं—
Punjab
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उत्तर पंजाब
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मध्य पंजाब
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दक्षिण पंजाब
Sindh
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कराची सिंध
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मध्य सिंध
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ऊपरला सिंध
Khyber Pakhtunkhwa (KP)
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उत्तरी KP
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दक्षिणी KP
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आदिवासी KP / फाटा रीजन
Balochistan
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पूर्व बलूचिस्तान
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पश्चिम बलूचिस्तान
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दक्षिण बलूचिस्तान
IPP का कहना है कि Pakistan की तुलना दुनिया के उन देशों से करनी चाहिए जहां छोटे-छोटे प्रशासनिक यूनिट के कारण शासन बेहतर होता है।
PPP और अन्य पार्टियों का विरोध—Sindh के बंटवारे पर सबसे बड़ा विवाद
Pakistan में PPP (Pakistan Peoples Party) ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। बिलावल भुट्टो की पार्टी का साफ कहना है कि Sindh को किसी भी कीमत पर नहीं बांटा जाएगा। पिछले महीने सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने चेतावनी देते हुए कहा था कि सिंध के हितों के खिलाफ कोई कदम मंजूर नहीं होगा। ANP, MQM विरोधी धड़े और बलूच राष्ट्रवादी पार्टियों ने भी इसे “बांटो और राज करो” की नीति बताया है।
Pakistan की राजनीति में हलचल—MQM-P का समर्थन, 28वां संविधान संशोधन का प्रस्ताव
जहां एक ओर कई पार्टियां विरोध में हैं, वहीं MQM-P ने इस प्रस्ताव को समर्थन देते हुए कहा है कि वह नए प्रांतों के लिए 28वें संविधान संशोधन को आगे बढ़ाएगी। Pakistan के कई थिंक-टैंक भी इस प्रस्ताव पर राय दे रहे हैं, जिनमें PILDAT प्रमुख अहमद बिलाल महबूब शामिल हैं। उनका कहना है कि इससे राजनीतिक टकराव, खर्च और अस्थिरता बढ़ सकती है।
MQM-P ने तो कहा है कि वह 28वें संविधान संशोधन के जरिए नए प्रांतों की मांग आगे बढ़ाएगी। (फाइल फोटो)
नए प्रांत बनाने की संवैधानिक बाधा—Pakistan संसद में दो-तिहाई बहुमत ज़रूरी
Pakistan के संविधान के मुताबिक किसी भी नए प्रांत के गठन के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है। ऐसे में गठबंधन सरकार के लिए यह कदम आसान नहीं होने वाला। यदि Pakistan वास्तव में 12 प्रांतों में बंटता है, तो देश का प्रशासनिक ढांचा, संसाधन बंटवारा और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।
एक्सपर्ट्स की चेतावनी—‘समस्या प्रांतों की संख्या नहीं, शासन की खामियां हैं’
पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सैयद अख्तर अली शाह का कहना है कि— “Pakistan की मूल समस्या प्रांतों की संख्या नहीं बल्कि शासन व्यवस्था की कमियां हैं। कमजोर संस्थाएं, जवाबदेही की कमी और स्थानीय सरकारों को अधिकार न देना सबसे बड़ा संकट है।” उनके मुताबिक बिना प्रशासनिक सुधारों के नए प्रांत बनाना हालात और भी खराब कर सकता है।
पाकिस्तान में राजनीतिक भूचाल, लेकिन रास्ता अभी लंबा
पाकिस्तान के 12 प्रांतों में विभाजन का प्रस्ताव सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी बड़ा फैसला माना जा रहा है। जहां सरकार की सहयोगी पार्टियां इसे सुधार का रास्ता बता रही हैं, वहीं प्रदेशों की क्षेत्रीय पार्टियां इसे अपनी पहचान और अधिकारों पर हमला मान रही हैं। आने वाले दिनों में Pakistan की संसद और सड़क—दोनों जगह इस मुद्दे पर गर्मी बढ़नी तय है।
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