बैंकॉक/नोम पेन्ह | थाईलैंड कंबोडिया एयरस्ट्राइक ने दक्षिण-पूर्व एशिया में एक बार फिर अशांति बढ़ा दी। रिपोर्ट्स के अनुसार थाईलैंड ने सोमवार सुबह F-16 फाइटर जेट से कंबोडिया में स्थित एक कैसीनो पर हमला किया। थाई सेना का दावा है कि यह कैसीनो असल में कंबोडियाई सैनिकों का नया बेस बन चुका था, जहां भारी हथियार, ड्रोन और युद्ध सामग्री जमा की जा रही थी। इसी गतिविधि को देखते हुए थाईलैंड ने इसे “प्रतिरोधात्मक कार्रवाई” बताया।

शांति समझौते के बाद भी तनाव क्यों नहीं थमा
यह हमला ऐसे समय हुआ जब दो महीने पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी सीजफायर कराया गया था। पांच दिनों तक चली लड़ाई में पहले ही 30 से अधिक नागरिक और सैनिक मारे गए थे। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ, बल्कि धीरे-धीरे फिर उबलने लगा। इसने साबित किया कि यह संघर्ष सिर्फ युद्धविराम से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक समाधान से ही शांत हो सकता है।
सीमा विवाद और प्राचीन मंदिरों पर संघर्ष
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सबसे तीखा विवाद प्रीह विहियर और ता मुएन थॉम जैसे प्राचीन शिव मंदिरों को लेकर है। ये मंदिर दोनों देशों की सीमा पर स्थित हैं, और मंदिरों के आसपास की जमीन पर दोनों का दावा है। इतिहास, मानचित्र और साम्राज्यों की पुरानी सीमाओं के कारण यह विवाद अत्यंत संवेदनशील हो गया है।
कंबोडिया का पक्ष: उकसावे की कार्रवाई
कंबोडिया ने थाईलैंड के आरोपों को झूठा बताया है। कंबोडियाई सरकार का कहना है कि उन्होंने कोई सैन्य गतिविधि नहीं बढ़ाई और वे शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। उनका आरोप है कि थाई सेना कई दिनों से “उकसावे वाली हरकतें” कर रही है, जिससे हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
थाई सैनिक अपने घायल साथी को हॉस्पिटल लेकर जाते हुए।
कंबोडियाई सैनिकों के हमले में एक थाई सैनिक को सीने पर गोली लगी। चेस्ट आर्मर की वजह से गोली शरीर के अंदर नहीं घुस पाई।
नागरिकों का पलायन और बॉर्डर का माहौल
थाई सरकार के अनुसार, सीमा से लगे इलाकों में स्थिति तनावपूर्ण है, जिसके चलते लगभग 70% स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है। कई लोगों के घर उजड़ गए, जबकि अस्पतालों में घायल सैनिकों और नागरिकों का इलाज जारी है। कंबोडियाई बॉर्डर इलाकों में भी हजारों लोग अपने परिवारों के साथ सुरक्षित जगहों की तलाश में निकल पड़े।
थाईलैंड के हवाई हमले के बाद कंबोडिया के बॉर्डर इलाके से लोग सुरक्षित जगहों पर जाते हुए।
क्षेत्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह झड़पें वर्षों की मेहनत से स्थिर हुए दोनों देशों के संबंधों को फिर से पीछे धकेल सकती हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर थाईलैंड कंबोडिया एयरस्ट्राइक का सिलसिला बढ़ा तो ASEAN की स्थिरता पर गहरा असर पड़ेगा।
(External DoFollow Link: https://en.wikipedia.org/wiki/Cambodia–Thailand_border_dispute)
मंदिर विवादों का 118 साल पुराना इतिहास
1907 में जब कंबोडिया फ्रांस के अधीन था, दोनों देशों के बीच 817 किमी लंबी सीमा तय की गई। इस सीमा में प्रीह विहियर मंदिर कंबोडिया के हिस्से में दिखाया गया, जबकि ता मुएन थॉम मंदिर थाईलैंड में। थाईलैंड ने शुरुआत से इसका विरोध किया। यही कारण है कि यह सीमा विवाद सौ साल से अधिक समय से बार-बार भड़कता रहा है।
ता मुएन थॉम और प्रीह विहियर मंदिर पर दावे
ता मुएन थॉम मंदिर तकनीकी रूप से थाईलैंड में स्थित है, लेकिन कंबोडिया इसे अपना ऐतिहासिक धरोहर बताता है, क्योंकि यह खमेर साम्राज्य के समय का है। दूसरी ओर प्रीह विहियर मंदिर का मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय तक गया, जिसने 1962 और फिर 2013 में यह फैसला दोहराया कि मंदिर और उसके आसपास की भूमि कंबोडिया की है।

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एमरॉल्ड ट्राइंगल की जंग कैसे भड़की
हाल ही में दोनों सेनाओं के बीच एमरॉल्ड ट्राइंगल पर भिड़ंत हुई, जहां थाईलैंड, कंबोडिया और लाओस की सीमाएं मिलती हैं। थाई सैनिकों पर आरोप है कि उन्होंने ता मुएन थॉम मंदिर के इर्द-गिर्द कंटीले तार लगा दिए और ड्रोन से निगरानी शुरू कर दी। इसके बाद झड़प बढ़ती गई, जिसमें दोनों ओर से सैनिक घायल हुए।
थाईलैंड की PM की कुर्सी विवाद में कैसे गई
15 जून को थाई PM पाइतोंग्तार्न शिनवात्रा ने कंबोडियाई नेता से फोन पर बातचीत करते हुए अपनी ही सेना की आलोचना कर दी। ऑडियो लीक होने के बाद पूरा देश उबल पड़ा और कोर्ट ने उन्हें पद से हटा दिया। उनका कहना था कि वह केवल शांति बहाल करने का तरीका तलाश रही थीं, लेकिन सेना के प्रभाव वाले देश में उनकी दलील नहीं चली।
क्या फिर बड़ा युद्ध हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि थाईलैंड कंबोडिया एयरस्ट्राइक अभी एक शुरुआती चेतावनी है, लेकिन अगर दोनों देशों ने कूटनीतिक बातचीत शुरू नहीं की तो यह संघर्ष बड़े युद्ध में बदल सकता है। मंदिरों की जमीन, राष्ट्रीय भावनाएं, राजनीतिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दखल—इन सभी कारणों से यह विवाद फिर वैश्विक संकट बन सकता है।
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