गुरुवार को मुंबई के पवई इलाके में स्थित RA स्टूडियो में एक चौंकाने वाली घटना हुई। 50 वर्षीय यूट्यूबर रोहित आर्या ने वेब सीरीज के ऑडिशन के बहाने 17 बच्चों सहित कुल 19 लोगों को बंधक बना लिया। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
ऑडिशन के नाम पर बच्चों को बुलाया गया
आरोपी ने 10 से 15 वर्ष की उम्र के करीब 100 बच्चों को “वेब सीरीज ऑडिशन” के नाम पर बुलाया था। यह ऑडिशन दो दिन चलने वाला था। पहले दिन सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन दूसरे दिन आरोपी ने 17 बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया और दरवाजे पर ताला लगा दिया। इसके बाद उसने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी किया, जिसमें उसने खुद को आतंकवादी मानने से इनकार किया और कहा कि वह सिर्फ कुछ नैतिक सवालों के जवाब चाहता है।
बच्चों को बंधक बनाने के बाद रोहित ने वीडियो जारी किया

आरोपी का वीडियो और धमकी
1 मिनट 45 सेकंड के वीडियो में रोहित ने कहा कि उसने आत्महत्या के बजाय यह कदम उठाया है। उसने चेतावनी दी कि अगर किसी ने उसे उकसाया, तो वह बच्चों को नुकसान पहुंचा देगा या स्टूडियो में आग लगा देगा। इस वीडियो के बाद पुलिस हरकत में आई।
वह जगह जहाँ 17 बच्चे बंधक थे

रा स्टूडियो का फ्रंट ऑफिस। यहीं 100 से ज्यादा बच्चे ऑडिशन के लिए पहुंचे थे।

स्टूडियो की पहली मंजिल पर बंधक बनाए गए बच्चे खिड़की से मदद मांगते दिखे।

बच्चों के बंधक बनाए जाने के बाद कमांडो घटनास्थल पर पहुंचे।
पुलिस और कमांडो का साहसी अभियान
दोपहर करीब डेढ़ बजे मुंबई पुलिस को घटना की सूचना मिली। इसके बाद क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) को बुलाया गया। आठ कमांडो की टीम ने रणनीति बनाकर बाथरूम के रास्ते से स्टूडियो में प्रवेश किया और अंदर मौजूद सभी 19 लोगों को सिर्फ 35 मिनट में सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ऑपरेशन के दौरान आरोपी ने एयर गन से पुलिस पर फायरिंग की। जवाब में पुलिस ने फायरिंग की, जिससे वह घायल हो गया।
एनकाउंटर और आरोपी की मौत
घायल रोहित आर्या को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां शाम 5:15 बजे उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि वह पुणे का रहने वाला था और यूट्यूबर के रूप में सक्रिय था। वह RA स्टूडियो में नियमित रूप से ऑडिशन आयोजित करता था और सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करता था।
राजनीतिक विवाद भी उभरा
घटना के बाद एक पुराना विवाद फिर सामने आया। बताया गया कि रोहित आर्या पहले “माय स्कूल ब्यूटीफुल स्कूल” योजना से जुड़ा था। उसने आरोप लगाया था कि उसे इस प्रोजेक्ट में 2 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं मिला।
शिवसेना नेता और पूर्व मंत्री दीपक केसरकर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि भुगतान प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता से हुई थी।
परिवारों में राहत और जांच जारी
सभी बच्चों को सुरक्षित निकालने के बाद उनके परिवारों ने राहत की सांस ली। पुलिस ने बच्चों की स्वास्थ्य जांच करवाई और काउंसलिंग की व्यवस्था की। वहीं, आरोपी की पृष्ठभूमि और उसके इरादों को समझने के लिए पुलिस ने सोशल मीडिया अकाउंट और उसके संपर्कों की जांच शुरू कर दी है।
भविष्य के लिए सबक
इस घटना ने बच्चों की सुरक्षा और ऑडिशन के नाम पर चल रही अनियमित गतिविधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन अब स्टूडियो और ऑडिशन आयोजकों की पृष्ठभूमि जांच अनिवार्य करने पर विचार कर रहा है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।





