जोधपुर, संवाददाता: मिथुन बिलाड़ा
बिलाड़ा क्षेत्र में Municipal Sanitation Recruitment Scam को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। नगर पालिका पीपाड़शहर में वर्ष 2018 में हुई सफाई कर्मचारी भर्ती को लेकर अब गंभीर आरोप सामने आए हैं। इस भर्ती को लेकर स्थानीय नागरिकों और समाज के लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई और योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर अनुचित तरीके से नियुक्तियां की गईं।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र का आरोप
पीपाड़शहर निवासी राकेश पुत्र गणपताराम वाल्मीकि ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2018 की सफाई कर्मचारी भर्ती में कुछ गैर-वाल्मीकि समाज के अभ्यर्थियों ने फर्जी और अवैध अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल की। शिकायत के अनुसार, इन प्रमाण पत्रों की न तो विधिवत जांच की गई और न ही भर्ती नियमों का पालन किया गया, जिससे भर्ती की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
मूल कार्य से दूर सफाई कर्मचारी
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सफाई कर्मचारी पद पर नियुक्त कई गैर-वाल्मीकि कर्मचारी आज अपने मूल कार्य यानी सफाई व्यवस्था से जुड़े कार्य नहीं कर रहे हैं। कुछ कर्मचारी फील्ड ड्यूटी में दिखाई ही नहीं देते, जबकि कुछ को नगर पालिका कार्यालयों या अन्य विभागों में तैनात कर दिया गया है। यह स्थिति न केवल भर्ती नियमों के खिलाफ है, बल्कि नगर की सफाई व्यवस्था को भी प्रभावित कर रही है।
घर बैठे वेतन लेने के आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ सफाई कर्मचारी बिना किसी नियमित कार्य के घर बैठे वेतन उठा रहे हैं। इससे न केवल नगर पालिका के संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है, बल्कि वास्तविक सफाई कार्य करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ भी पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कारण शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है।
प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन
इस पूरे मामले को लेकर राकेश वाल्मीकि ने उपखंड अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें Municipal Sanitation Recruitment Scam की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में भर्ती प्रक्रिया से लेकर वर्तमान तैनाती तक सभी बिंदुओं की गहन जांच कराने की मांग की गई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
नियमों की अनदेखी से बढ़ा आक्रोश
स्थानीय लोगों और वाल्मीकि समाज में इस मामले को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि सफाई कर्मचारी भर्ती से जुड़े नियम स्पष्ट हैं, फिर भी वर्षों से नियमों की अनदेखी की जा रही है। इससे न केवल सामाजिक असंतुलन पैदा हुआ है, बल्कि पात्र अभ्यर्थियों के साथ अन्याय भी हुआ है।
निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2018 में नियुक्त सभी सफाई कर्मचारियों के दस्तावेजों और अनुभव प्रमाण पत्रों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जो कर्मचारी अपने मूल पद पर कार्य नहीं कर रहे हैं, उन्हें तत्काल फील्ड में सफाई कर्मचारी के रूप में लगाया जाए। वहीं, फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
न्यायालय जाने की चेतावनी
राकेश वाल्मीकि ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वह न्यायालय की शरण लेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
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