टोंक, संवाददाता: सुरेश भदाला
NABL Accreditation आज के दौर में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोगशाला गुणवत्ता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन चुका है। वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं न केवल शोध की विश्वसनीयता बढ़ाती हैं, बल्कि देश की वैज्ञानिक साख को भी मजबूत करती हैं। इसी उद्देश्य को लेकर राजस्थान के अविकानगर में “गुणवत्ता यात्रा: एनएबीएल एक्रेडिटेशन पर जागरूकता कार्यक्रम” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसने शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के बीच गुणवत्ता मानकों को लेकर नई चेतना पैदा की।
अविकानगर में कार्यशाला का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
यह कार्यशाला आईसीएआर–केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान (CSWRI), अविकानगर में आयोजित की गई। कार्यक्रम का आयोजन क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) और CSWRI के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। NABL Accreditation Awareness Program का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशालाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करना और वैज्ञानिकों को एक्रेडिटेशन प्रक्रिया की व्यावहारिक समझ देना था।
मुख्य अतिथि का संबोधन: शोध और गुणवत्ता का संबंध
कार्यशाला के मुख्य अतिथि राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर (जयपुर) के कुलगुरु प्रोफेसर (डॉ.) त्रिभुवन शर्मा रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पशुधन क्षेत्र राज्य और देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में निरंतर योगदान दे रहा है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि पशु एवं पशु चिकित्सा विज्ञान में उल्लेखनीय शोध उपलब्धियां होने के बावजूद प्रयोगशालाओं के एक्रेडिटेशन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। डॉ. शर्मा ने NABL Accreditation Awareness Program को समय की मांग बताते हुए कहा कि यदि भारतीय प्रयोगशालाएं वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहना चाहती हैं, तो उन्हें गुणवत्ता और प्रमाणन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
CSWRI का दृष्टिकोण: एक्रेडिटेशन की दिशा में ठोस पहल
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में CSWRI के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. अरुण कुमार तोमर ने मुख्य अतिथि एवं सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने NABL Accreditation Awareness Program के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आश्वस्त किया कि CSWRI की प्रयोगशालाओं को शीघ्र ही एनएबीएल एक्रेडिटेशन प्रक्रिया के अंतर्गत लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं का एक्रेडिटेशन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि गुणवत्ता संस्कृति को संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया है, जिससे शोध परिणामों की विश्वसनीयता बढ़ती है।
NABL Accreditation क्या है और क्यों आवश्यक
NABL (National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories) भारत में परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशालाओं को मान्यता प्रदान करने वाली शीर्ष संस्था है। NABL Accreditation Awareness Program के माध्यम से वैज्ञानिकों को बताया गया कि यह मान्यता ISO/IEC 17025 जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित होती है। एक्रेडिटेशन प्राप्त प्रयोगशालाओं के परीक्षण परिणाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाते हैं, जिससे अनुसंधान, उद्योग और नीति निर्माण में उनका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
एक्रेडिटेशन प्रक्रिया और मानदंडों की विस्तृत जानकारी
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता NABL, QCI अहमदाबाद की संयुक्त निदेशक डॉ. भूमि राजगुरु रहीं। उन्होंने NABL Accreditation Awareness Program के अंतर्गत एक्रेडिटेशन प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, तकनीकी दक्षता और गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक्रेडिटेशन के दौरान प्रयोगशाला की तकनीकी क्षमता, स्टाफ की दक्षता, उपकरणों का अंशांकन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रियाओं का गहन मूल्यांकन किया जाता है।
वैज्ञानिकों की भागीदारी और संवाद
इस कार्यशाला में राजस्थान राज्य के विभिन्न ICAR संस्थानों और राज्य कृषि एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं से लगभग 70 वैज्ञानिकों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागी अपने-अपने संस्थानों में NABL Accreditation Awareness Program को लागू करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों ने अपने अनुभव साझा किए और एक्रेडिटेशन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं पर सवाल पूछे, जिनका समाधान विशेषज्ञों द्वारा किया गया।
कार्यशाला का समन्वय और संस्थागत सहयोग
कार्यशाला का सफल समन्वय डॉ. एस.एस. डांगी और डॉ. स्रोबना सरकार द्वारा किया गया। इस दौरान डॉ. अरविंद सोनी, डॉ. राजीव कुमार और डॉ. अजीत सिंह महला ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। CSWRI अविकानगर के विभिन्न प्रभागों के प्रमुख जैसे डॉ. आर.एस. भट्ट, डॉ. एस.एस. मिश्रा, डॉ. जी.जी. सोनवाणे, डॉ. अजय कुमार और डॉ. एल.आर. गुर्जर सहित अनेक संकाय सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
भारतीय अनुसंधान संस्थानों के लिए NABL की प्रासंगिकता
भारतीय अनुसंधान संस्थानों को वैश्विक मानकों से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे न केवल शोध की गुणवत्ता सुधरती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और फंडिंग के अवसर भी बढ़ते हैं
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