भारत में नवंबर के मध्य तक आमतौर पर हल्की सर्दी महसूस की जाती है, लेकिन इस वर्ष परिस्थितियां बिल्कुल अलग रहीं। देश के कई हिस्सों में नवंबर का पहला पखवाड़ा सामान्य से काफी ठंडा रहा, जो मौसम विज्ञानियों के अनुसार असामान्य तो है, पर पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं। उत्तरी मैदानी इलाकों से लेकर मध्य भारत और महाराष्ट्र तक लगातार न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे रिकॉर्ड हुआ। IMD वैज्ञानिकों का कहना है कि यह एक क्लाइमेटोलॉजिकल घटना है, जिसमें वर्ष-दर-वर्ष उतार-चढ़ाव देखा जाता है।
IMD ने बताया—नवंबर में इतनी ठंड क्यों?
IMD के अनुसार इस बार पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियां अपेक्षाकृत कम रहीं, जिसके कारण आसमान साफ और हवा शुष्क बनी रही। इस तरह की परिस्थितियों में रात को धरती तेजी से ठंडी होती है, जिससे न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। हवा का दबाव भी स्थिर रहा, जिससे ठंडी हवाएं उत्तर से मध्य भारत और महाराष्ट्र तक बिना बाधा के पहुंचीं, और कई जगह तापमान में सामान्य से 3–6 डिग्री तक की गिरावट दर्ज की गई।
मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड
मंगलवार को मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में ‘कोल्ड टू सीवियर कोल्ड वेव’ जैसी स्थिति बनी रही। बुधवार और शुक्रवार को भी इन क्षेत्रों में ठंड की लहर जारी रहने की आशंका जताई गई है। कई जगहों पर सुबह के समय घना कोहरा भी देखा गया, जिससे विजिबिलिटी पर असर पड़ा।
दिल्ली में 11 साल का रिकॉर्ड टूटा
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सर्दी सामान्य से कहीं पहले दस्तक दे चुकी है। IMD के अनुसार 15 नवंबर से लगातार न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे बना हुआ है। 18 नवंबर को दिल्ली का न्यूनतम तापमान 8.7°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग 4°C कम है। यह पिछले 11 वर्षों में नवंबर महीने का सबसे कम न्यूनतम तापमान है। इससे साफ है कि इस बार सर्दी का सीजन पहले से तेज, गहरा और लंबा रहने वाला है।
IMD के तापमान मैप्स क्या बताते हैं?
ऑल-इंडिया टेम्परेचर एनॉमली मैप्स (1–18 नवंबर) के आंकड़े बताते हैं कि देश के बड़े हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 2–3°C नीचे रहा। कई राज्यों में यह अंतर 4–6°C तक पहुंच गया, जो इस महीने के लिए काफी असामान्य है। इसका मतलब है कि एक संपूर्ण क्षेत्रीय प्रभाव देखने को मिला—उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत, गुजरात, महाराष्ट्र और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों तक हर जगह ठंड का असर सामान्य से अधिक रहा।
मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी
IMD ने बताया कि आने वाले दिनों में भी न्यूनतम तापमान में गिरावट जारी रह सकती है। नवंबर के अंत और दिसंबर की शुरुआत में ठंड का असर और तेज होगा। हालांकि इसे दीर्घकालिक जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से पहले कई मौसमीय कारकों पर गौर करना जरूरी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हर साल मौसम की स्थिति अलग होती है और इस बार साफ मौसम, कम बादल, शुष्क हवाएं और उत्तर से आने वाली ठंडी हवाएं मुख्य कारण बने।
जनजीवन पर बढ़ती ठंड का असर
नवंबर में ही पारा गिरने के कारण कई राज्यों में सुबह-शाम की दिनचर्या प्रभावित हुई है। स्कूलों में समय बदले जाने की चर्चा चल रही है, जबकि अस्पतालों में सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। किसान भी मौसम में अचानक आई इस गिरावट से चिंतित हैं, क्योंकि इससे कुछ फसलों के विकास पर असर पड़ सकता है।
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