बूंदी, संवाददाता: रवि गौत्तम
राजस्थान में वर्षों से शिक्षा की अलख जगाने वाले प्रबोधकों की पुरानी सेवा गणना का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता नजर आ रहा है। लंबे समय से लंबित इस मांग को लेकर आज 1 फरवरी 2026 को अखिल राजस्थान प्रबोधक संघ जिला बूंदी का प्रतिनिधिमंडल जिला अध्यक्ष नूतन तिवारी के नेतृत्व में बूंदी विधायक एवं पूर्व वित्त राज्य मंत्री हरिमोहन शर्मा से मिला।
विधायक से मिलकर सौंपा गया औपचारिक ज्ञापन
प्रतिनिधिमंडल ने विधायक को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए प्रबोधकों की सेवा से जुड़ी विसंगतियों और वर्षों से हो रहे अन्याय को तथ्यात्मक रूप से सामने रखा। बैठक के दौरान युवा कांग्रेस नेता एवं अर्बन बैंक के चेयरमैन सत्येश शर्मा की उपस्थिति ने इस विषय को और गंभीरता प्रदान की।
ज्ञापन में प्रमुख रूप से क्या रखा गया
अखिल राजस्थान प्रबोधक संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की कि पैरा टीचर्स काल (1999 से 2008) की सेवा को प्रबोधक सेवा में जोड़ा जाए, ताकि प्रबोधकों को उनकी वास्तविक सेवा अवधि के अनुरूप सभी वित्तीय एवं पदोन्नति लाभ मिल सकें।
1999 से शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर सेवा
संघ के महामंत्री रणजीत सिंह हाडा, धनंजय शर्मा एवं कोषाध्यक्ष अशोक चोहला ने बताया कि प्रबोधक वर्ष 1999 से पैरा टीचर्स के रूप में राजस्थान के दूर-दराज गांवों, ढाणियों, कस्बों और नगरों में शिक्षा का कार्य कर रहे हैं। सीमित संसाधनों, कम मानदेय और असुरक्षित भविष्य के बावजूद इन्होंने शिक्षा व्यवस्था को संभाले रखा।
2008 में स्थायी नियुक्ति, लेकिन अधूरी न्याय प्रक्रिया
वर्ष 2008 में प्रबोधक पद पर स्थायी नियुक्ति दी गई, लेकिन उससे पूर्व की लगभग 9 वर्षों की सेवा को आज तक सेवा गणना में शामिल नहीं किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि हजारों प्रबोधक 9, 18 और 27 वर्ष के सेवा लाभ से वंचित रह गए।
सेवानिवृत्ति के कगार पर खड़े प्रबोधक
संघ ने चिंता जताते हुए बताया कि बड़ी संख्या में प्रबोधक बिना किसी वास्तविक सेवा लाभ के सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि अधिकांश प्रबोधक भाई-बहन वर्तमान में सेवानिवृत्ति के नजदीक हैं। यह स्थिति उनके आर्थिक भविष्य को गंभीर संकट में डाल रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश की अनदेखी
प्रबोधक संघ ने यह भी बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में पूर्व सेवा की गणना को मान्यता देते हुए समस्त लाभ प्रदान करने का आदेश पारित किया है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा इस आदेश को व्यापक रूप से लागू नहीं किया गया, जो न्यायिक आदेशों की अवहेलना के समान है।
सरकार की चुप्पी से बढ़ता असंतोष
प्रबोधकों का कहना है कि वे समय-समय पर शांतिपूर्ण आंदोलनों और ज्ञापनों के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित करते रहे हैं, लेकिन पुरानी सेवा गणना की मांग पर सरकार की चुप्पी निराशाजनक है। इससे प्रबोधक वर्ग में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
विधायक हरिमोहन शर्मा का स्पष्ट आश्वासन
बूंदी विधायक एवं पूर्व वित्त राज्य मंत्री हरिमोहन शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि बजट सत्र में प्रबोधकों की पुरानी सेवा गणना का मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रबोधकों को न्याय दिलाना उनकी प्राथमिकता है।
प्रबोधकों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता
विधायक शर्मा ने कहा कि ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में प्रबोधकों की भूमिका अहम रही है। सरकार का दायित्व है कि ऐसे शिक्षाकर्मियों को उनका हक समय पर मिले।
बड़ी संख्या में प्रबोधकों की मौजूदगी
इस अवसर पर शहर अध्यक्ष जाकिर हुसैन अंसारी, बूंदी ब्लॉक अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा, पूर्व प्रदेश प्रतिनिधि रमेश शास्त्री, महेश दाधीच, मदन जंगम, सभा अध्यक्ष दशरथ शर्मा, राजन शुक्ला, महावीर मीणा, अमर सिंह सहित बड़ी संख्या में प्रबोधक उपस्थित रहे।
आंदोलन को और तेज करने की तैयारी
अखिल राजस्थान प्रबोधक संघ ने स्पष्ट किया कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। आने वाले समय में संभागीय और राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की रणनीति बनाई जा रही है।
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