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राजस्थान में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री महंगी: सरकार ने 6 साल बाद कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ाई

राजस्थान में मकान, दुकान और अन्य कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाना अब पहले से अधिक महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने छह साल बाद कंस्ट्रक्शन कॉस्ट बढ़ाने का निर्णय लिया है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस बार स्टांप ड्यूटी और जमीन की डीएलसी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती निर्माण सामग्री और मजदूरी की कीमतों को देखते हुए कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में संशोधन आवश्यक था।

 

सरकार ने इस बार रजिस्ट्री फीस (स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क) और जमीन की डीएलसी दरें न बढ़ाकर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (निर्माण लागत) को बढ़ाया है। AI जनरेटेड फोटो।

सरकार ने इस बार रजिस्ट्री फीस (स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क) और जमीन की डीएलसी दरें न बढ़ाकर कंस्ट्रक्शन कॉस्ट (निर्माण लागत) को बढ़ाया है।

 

खरीदारों पर कितना असर पड़ेगा?

कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में बढ़ोतरी का असर आम घर खरीदारों पर सीमित रहेगा। दरअसल शहरों और कस्बों में प्रॉपर्टी की बिक्री अक्सर सरकारी तय न्यूनतम वैल्यू यानी डीएलसी दर और कंस्ट्रक्शन कॉस्ट से ज्यादा कीमत पर होती है। ऐसे में सामान्य मकान, दुकान या फ्लैट खरीदने वालों पर आर्थिक बोझ ज्यादा नहीं आएगा। हां, बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट्स, मॉल्स, होटल्स और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टीज पर इसका प्रभाव जरूर दिखेगा क्योंकि उनके निर्माण मूल्य की गणना कंस्ट्रक्शन कॉस्ट के आधार पर बढ़ती है।

 

RCC मकानों की निर्माण लागत 600 रुपए प्रति वर्गफुट बढ़ी

वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, आरसीसी छत वाले मकानों की निर्माण लागत 1200 रुपए प्रति वर्गफुट से बढ़ाकर 1800 रुपए कर दी गई है। इस प्रकार सामान्य आवासीय निर्माण की सरकारी लागत में सीधे 600 रुपए प्रति वर्गफुट की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी रजिस्ट्री के दौरान बनने वाले कुल मूल्य को बढ़ाएगी, जिससे रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी की राशि भी बढ़ सकती है।

 

मॉल, मल्टीप्लेक्स और होटलों की लागत में भी बदलाव

सरकार ने सिर्फ आवासीय भवनों ही नहीं, बल्कि बड़े कमर्शियल निर्माण परियोजनाओं की लागत भी संशोधित की है। यदि किसी जमीन पर मल्टीस्टोरी शॉपिंग मॉल बना है जिसमें बेसमेंट और मल्टीप्लेक्स शामिल है, तो उसकी निर्माण लागत 1815 रुपए से बढ़ाकर 2100 रुपए प्रति वर्गफुट कर दी गई है। वहीं बिना मल्टीप्लेक्स वाले मॉल की लागत 1430 रुपए से बढ़कर 2000 रुपए प्रति वर्गफुट कर दी गई है। होटलों और क्लबों की निर्माण लागत में भी बढ़ोतरी की गई है। 5-स्टार या उससे ऊंची श्रेणी के होटल की लागत 2090 रुपए से बढ़ाकर 2500 रुपए प्रति वर्गफुट कर दी गई है, जबकि 5-स्टार से नीचे की श्रेणी के होटलों की लागत 1595 से बढ़ाकर 2100 रुपए हो गई है।

 

बाउंड्री वॉल पर भी लगेगा अधिक खर्च

सरकार ने छोटी निर्माण इकाइयों की लागत में भी संशोधन किया है। अगर किसी प्लॉट पर केवल बाउंड्रीवाल बनी है, तो उसकी निर्माण लागत 400 रुपए प्रति रनिंग मीटर से बढ़ाकर 500 रुपए कर दी गई है। यह बदलाव उन लोगों को प्रभावित करेगा जो खाली जमीन को सुरक्षित रखने के लिए केवल बाउंड्री वाल तैयार करते हैं।

 

इंडस्ट्रियल शेड और वेयरहाउस की लागत भी बढ़ी

औद्योगिक क्षेत्रों में बनने वाले शेड, वेयरहाउस और बड़े गोदामों की निर्माण लागत को भी संशोधित किया गया है। पहले इनकी लागत 4000 रुपए प्रति वर्गमीटर थी, जिसे अब 5000 रुपए कर दिया गया है। इसका सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ेगा जो अपने प्लॉट्स पर नई संरचनाएं विकसित करते हैं या विस्तार करते हैं।

 

बदलाव क्यों किए गए?

सरकार का कहना है कि पिछले छह वर्षों में निर्माण सामग्री—जैसे सीमेंट, स्टील, मेटल—और मजदूरी की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण वास्तविक निर्माण लागत और सरकारी कंस्ट्रक्शन कॉस्ट में बड़ा अंतर पैदा हो गया था। इस गैप को खत्म करने और सरकारी मूल्यांकन को यथार्थवादी बनाने के लिए यह बदलाव किया गया है।

 

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