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वैष्णो देवी में अलर्ट, वर्दी घुसपैठ और नारियल बम को लेकर सुरक्षा सख्त

दिल्ली में हुए कार बम धमाके के बाद पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ गई हैं। श्री माता वैष्णो देवी तीर्थस्थल देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, और इस हमले के बाद इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। एजेंसियों ने साफ किया है कि यह पवित्र स्थल पहले भी आतंकियों के रडार पर रहा है, इसलिए किसी भी स्थिति को हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा हालातों में भले ही किसी आतंकी संगठन से नई धमकी नहीं मिली है, लेकिन पिछले वर्षों में यहां कई बार खतरे के संकेत प्राप्त हुए थे। यही कारण है कि दिल्ली विस्फोट के तुरंत बाद तीर्थमार्ग की सुरक्षा समीक्षा शुरू कर दी गई है।

 

13 किमी मार्ग पर सुरक्षा बढ़ी, कमांडो की तैनाती

कटरा से लेकर पवित्र गुफा तक लगभग 13 किलोमीटर लंबे मार्ग पर सुरक्षा को और कड़ा किया जा रहा है। स्थानीय पुलिस के कमांडो दस्तों के साथ-साथ सादे कपड़ों में सुरक्षाकर्मियों की संख्या बढ़ा दी गई है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि भीड़भाड़ के बीच किसी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ा जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि त्योहारों और छुट्टियों के समय तीर्थयात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे सुरक्षा की चुनौती और कठिन हो जाती है। ऐसे में लगातार निगरानी और सख्त जांच अनिवार्य है।

 

वर्दी घुसपैठ का खतरा, एजेंसियों की चेतावनी

खुफिया एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि आतंकी सेना या पुलिस जैसी वर्दी पहनकर तीर्थस्थल में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। यह चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि वर्दीधारी लोग आमतौर पर संदेह के घेरे में नहीं आते, जिससे सुरक्षा चूक की संभावना बढ़ जाती है।

इससे श्राइन बोर्ड उलझन में है कि ड्यूटी पर न होने वाले वर्दीधारी सुरक्षा कर्मियों के दर्शनों पर रोक लगाई जाए या नहीं। इससे पहले भी ऐसी रोक लगाई गई थी, लेकिन ड्यूटी पर तैनात जवानों को इससे छूट दी गई थी।

 

नारियल बम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

गुफा के भीतर सुरक्षा के मद्देनज़र पहले से ही धातु की वस्तुओं, बेल्ट, कैमरा और प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाने वाले नारियल तक पर प्रतिबंध है। एजेंसियों को आशंका है कि आतंकवादी नारियल की आड़ में ‘नारियल बम’ का इस्तेमाल कर हमला कर सकते हैं।

जानकारी मिली है कि कटरा और गुफा मार्ग से पहले भी संदिग्ध नारियल बरामद किए जा चुके हैं। इस कारण से सुरक्षा अधिकारियों ने हाल ही में आए उस प्रस्ताव का विरोध किया जिसमें श्रद्धालुओं को नारियल गुफा द्वार तक ले जाने की अनुमति देने की बात कही गई थी।

 

मेटल डिटेक्टर और तलाशी व्यवस्था की कमियां

13 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मेटल डिटेक्टर और तलाशी व्यवस्था तो मौजूद है, लेकिन कई बार यह औपचारिकता बनकर रह जाती है। भीड़ बढ़ने पर अक्सर यात्रियों की नाराज़गी के कारण श्राइन बोर्ड के अधिकारी सुरक्षा कर्मियों पर दबाव डालते हैं कि अधिक जांच न की जाए।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भीड़ नियंत्रण के चक्कर में कई बार वास्तविक सुरक्षा खतरे नजरअंदाज हो जाते हैं, जो किसी बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।

 

गुफा-द्वार तक नारियल ले जाने का प्रस्ताव विवादों में

सुरक्षा अधिकारियों ने उस प्रस्ताव का भी विरोध किया है जिसमें श्रद्धालुओं को नारियल गुफा-द्वार तक ले जाने की इजाजत देने की सिफारिश की गई थी। उनका कहना है कि अगर आतंकी नारियल बम गुफा-द्वार तक पहुंचाने में सफल हो जाते हैं, तो यह न सिर्फ भारी जान-माल का नुकसान करेगा बल्कि यह संदेश भी देगा कि सुरक्षा व्यवस्था को आसानी से भेदा जा सकता है।

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट कहा है कि सुरक्षा में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती, चाहे इसके लिए यात्रियों को कुछ प्रतिबंधों से गुजरना पड़े।

 

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