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वन्य जीव शिकार प्रकरण में चारों आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

बाराँ (किशनगंज), रिपोर्टर – मदन लाल शाक्यवाल

 

किशनगंज वन विभाग द्वारा बुधवार को कार्रवाई कर पकड़े गए वन्य जीव शिकार प्रकरण के चारों आरोपियों को गुरुवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए।यह कार्रवाई वन विभाग की टीम द्वारा वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), नई दिल्ली से प्राप्त गोपनीय सूचना के आधार पर की गई थी।क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक शर्मा ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है—

  • राजू, पुत्र घनश्याम सपेरा, कालबेलिया जाति, उम्र 27 वर्ष, निवासी कुंशपुर, तहसील बमोरी, जिला गुना (म.प्र.)

  • विनोद, पुत्र नंदलाल, कालबेलिया, उम्र 27 वर्ष, निवासी सोमीपुरा टॉपर, नाहरगढ़, तहसील किशनगंज

  • पवन, पुत्र भीमा, कालबेलिया, उम्र 19 वर्ष, निवासी डेगनी जागीर, थाना अटरू

  • कुलदीप, पुत्र रंगलाल, कालबेलिया, निवासी डेंगिनी जागीर, अटरू

वन विभाग की टीम ने इन सभी को वन्य जीव अवैध व्यापार में संलिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार किया।

 

48 हाथजोड़ी, हेनिपेनिस और अन्य अवैध सामग्री बरामद

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में वन्य जीव से संबंधित अवैध सामग्री बरामद की गई, जिसमें—

  • 48 हाथजोड़ी

  • हैनिपेनिस (Monitor Lizard Hemipenis)

  • आर्गन

शामिल हैं। ये वस्तुएं प्रायः तंत्र-मंत्र, अंधविश्वास और अवैध वन्यजीव व्यापार में उपयोग की जाती हैं।

 

क्या है हाथजोड़ी और क्यों है अवैध?

हाथजोड़ी असल में मॉनिटर लिज़र्ड (वराणसू स्पा) के शरीर का अंग है, जिसका दुरुपयोग कुछ लोगों द्वारा कथित तांत्रिक क्रियाओं, ‘शुभ लाभ’, ‘धन प्राप्ति’ और ‘शक्ति वृद्धि’ के नाम पर किया जाता है।लेकिन यह पूरी तरह अवैज्ञानिक, गैर-कानूनी और वन्यजीव संरक्षण के खिलाफ गतिविधि है।मॉनिटर लिज़र्ड भारत के वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की शेड्यूल-1 में शामिल एक अत्यंत संरक्षित प्रजाति है।
इसका—

  • शिकार,

  • पकड़ना,

  • व्यापार,

  • अवशेषों का संग्रह,

  • खरीद–फरोख्त

सख्त रूप से प्रतिबंधित है। इसके लिए 3 से 7 वर्ष की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

 

उपवन संरक्षक डॉ. सुनील कुमार गौड़ के निर्देशन में हुई कार्रवाई

यह बड़ी कार्रवाई उपवन संरक्षक, बारां—डॉ. सुनील कुमार गौड़ के निर्देशन में की गई।ऑपरेशन में क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक शर्मा, रेंजर भूपेंद्र सिंह हाड़ा, तथा विभाग की विशेष टीम शामिल रही।वन विभाग ने बताया कि प्रकरण वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की कई धाराओं के तहत दर्ज कर लिया गया है तथा विस्तृत अनुसंधान शुरू कर दिया गया है।

 

न्यायालय का फैसला—14 दिन की न्यायिक हिरासत

गुरुवार को चारों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने सभी को 14 दिनों के लिए जेल भेजने का आदेश दिया।वन विभाग इस मामले में आगे भी पूछताछ और नेटवर्क की जांच करेगा, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अवैध वन्यजीव तस्करी में और कौन लोग शामिल हैं।किशनगंज वन विभाग की यह कार्रवाई वन्यजीव तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।मॉनिटर लिज़र्ड के अवैध व्यापार पर रोक लगाने में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।

 

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