नई दिल्ली | यूनेस्को ने दिवाली को अपनी इंटैन्जिबल कल्चरल हेरिटेज यानी अमूर्त विश्व धरोहर की सूची में शामिल करके भारत के लिए ऐतिहासिक क्षण दर्ज किया है। यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब भारत, राजधानी दिल्ली में यूनेस्को की इंटर-गवर्नमेंटल कमेटी फॉर इंटैन्जिबल हेरिटेज की 20वीं बैठक की मेजबानी कर रहा है। इस बैठक में दुनियाभर के सांस्कृतिक प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
दिवाली के इस दर्जे को भारत की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति की वैश्विक पहचान माना जा रहा है। यह त्योहार सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बसे करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। अयोध्या में हाल ही में आयोजित दीपोत्सव में सरयू नदी के घाट पर 26.17 लाख दीये जलाए गए थे, जिसने इस विरासत के भव्य स्वरूप का दुनिया के सामने प्रदर्शन किया।

पीएम मोदी ने कहा—‘दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा’
दिवाली यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X (पूर्व में ट्विटर) पर बधाई देते हुए कहा कि दिवाली भारत की संस्कृति, प्रकृति और ज्ञान परंपरा से गहराई से जुड़ी है। पीएम मोदी ने लिखा—“दिवाली हमारी सभ्यता की आत्मा है। इसकी वैश्विक मान्यता हमारे त्योहार की लोकप्रियता को और बढ़ाएगी। प्रभु श्रीराम के आदर्श हमें सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे।” यह बयान भारत की सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और गौरव को दर्शाता है। दिवाली का महत्व सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक रूप से भी गहरा है।
भारत की 15 अमूर्त धरोहरें पहले से सूची में
दिवाली के शामिल होने के साथ ही भारत की अमूर्त विरासतों की सूची और समृद्ध हो गई है। यूनेस्को की इंटैन्जिबल वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में वे परंपराएँ शामिल की जाती हैं जिन्हें छू नहीं सकते लेकिन अनुभव कर सकते हैं। भारत की 15 धरोहरें पहले से विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी हैं, जिनमें शामिल हैं:
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दुर्गा पूजा
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कुंभ मेला
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वैदिक मंत्रोच्चार
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रामलीला
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छाऊ नृत्य
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योग
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नवकल्या
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और कई अन्य सांस्कृतिक परंपराएँ
विस्तृत सूची को आप भारत सरकार के PIB पोर्टल पर भी देख सकते हैं।
(External DoFollow Source: https://pib.gov.in)

दिल्ली में UNESCO बैठक: 8 से 13 दिसंबर तक विशेष आयोजन
दिवाली यूनेस्को विश्व धरोहर दर्ज होने की घोषणा ऐसे समय पर हुई, जब दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार UNESCO की ऐतिहासिक बैठक की मेजबानी कर रहे हैं। यह बैठक 8 से 13 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें भारत की सांस्कृतिक ताकत को दुनिया के सामने रखने की विस्तृत योजना बनाई गई है। इसी सिलसिले में केंद्र सरकार ने 10 दिसंबर को एक विशेष दीपावली समारोह आयोजित करने का फैसला किया है, जिसमें विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाएगा।
दिल्ली सरकार की विशेष तैयारियाँ: सरकारी इमारतें सजेंगी
दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने बताया कि 10 दिसंबर को दिल्ली सरकार दिवाली का विशेष आयोजन करेगी। सभी सरकारी इमारतें सजाई जाएँगी, दिल्ली हाट में सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे और लाल किले पर हजारों दीये जलाए जाएँगे। मंगलवार रात दिल्ली सचिवालय तिरंगे रंगों की रोशनी से जगमगाया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुईं।
सरकार का मकसद है दिवाली को “अंधकार से प्रकाश की ओर” ले जाने वाले वैश्विक संदेश के रूप में प्रस्तुत करना, ताकि यूनेस्को की सूची में भारत का सांस्कृतिक दावा और अधिक मज़बूत हो सके।
UNESCO लिस्टिंग का सांस्कृतिक महत्व
दिवाली यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल होना सिर्फ एक प्रतीकात्मक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान और आध्यात्मिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूती से स्थापित करता है। यह दुनिया को यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक जीवित सभ्यता है जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी सदियों पहले थी। इस लिस्टिंग से दिवाली से जुड़े पारंपरिक कार्यक्रमों, कलाओं, शिल्पों, दीपोत्सवों और धार्मिक अनुष्ठानों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
दिवाली का यूनेस्को द्वारा अमूर्त विश्व धरोहर घोषित होना भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक मान्यता है। यह सिर्फ त्योहार की जीत नहीं, बल्कि भारत की पहचान, परंपरा और सभ्यता की ऐतिहासिक विजय है। आने वाले वर्षों में यह कदम भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और अधिक मज़बूत करेगा।
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